मुख्यमंत्री का आदेश जिले में 10 दिन भी नहीं चल सका। शहरी इलाकों में 22 घंटे और ग्रामीण इलाकों में 18 घंटे के दावे की हवा निकल चुकी है। अघोषित कटौती से हर वर्ग के लोग त्रस्त हो गए हैं। कड़ाके की ठंड के बीच कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। ग्रामीण इलाकों में बमुश्किल 10 और शहरी इलाकों में 14 घंटे ही बिजली किश्तों में मिल रही है।
बेहतर बिजली आपूर्ति के लिए सरकार से लेकर प्रशासन की ओर से भले ही दिशा-निर्देश जारी किया जा रहा है लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसो दूर है। पखवारे भर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर नगरीय और ग्रामीण इलाकों का शेड्यूल जारी कर आपूर्ति की बात कही गई थी। शुरूआती दिनों में इसका असर भी दिखा लेकिन ढाक के पात वाली कहावत फिर चरितार्थ हो गई। मुश्किल से 10 दिन गुजरा की ठंड बढ़ने के साथ ही बिजली कटौती भी बढ़ गई। नगर से लेकर गांव तक अघोषित कटौती से हाहाकार मच गया है। सुबह-शाम की कटौती से सभी लोग बेहाल हो गए हैं। ज्ञानपुर नगर में शनिवार की शाम चार बजे से छह बजे तक, सात बजे से नौ बजे तक, रात में एक बजे से भोर में चार बजे तक, रविवार सुबह सात बजे से 10 बजे तक बिजली कटी। सुबह बिजली न रहने से ठंड में नहाने के लिए लोगों को परेशान होना पड़ता है।
शाम को कटौती से व्यापार भी प्रभावित हो रहा है। चौरी संवाददाता के अनुसार, इलाके में 10 घंटे भी बिजली नहीं मिल रही है। चौरी और ममहर उपकेंद्र से जुड़े रोटहां, मानिकपुर, लक्षापुर, चौरी, अमवां, जद्दूपुर, भुलईपुर, कंधिया, लठिया, ममहर बाजार, चौरी बाजार, चहरपुर, बरवां, धनवतिया समेत 120 गांव में सात घंटे बिजली मिल रही है। इसी तरह दुर्गागंज के मिश्राईनपुर उपकेंद्र से जुड़े 30 गावों में बिजली आपूर्ति बेपटरी है। कमोबेश जिले भर में यही स्थिति है। इस बारे में अधिशासी अभियंता अवधेश पासवान का कहना है कि सीएम के निर्देश पर करीब 15 दिनों तक बिजली आपूर्ति बेहतर रही। पिछले पांच दिनों से मेन से कटौती की जा रही है। इससे लोगों को मुश्किलें हो रही है। जिले स्तर में कहीं कोई दिक्कत नहीं है।