ज्ञानपुर। रबी सीजन में रजवाहों और माइनरों की सफाई के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। जिसको लेकर संगठनों और किसानों में नाराजगी जताई है। करीब 350 किमी में फैले नहर और माइनर की सफाई के लिए शासन से 23 लाख मिले हैं। ऐसे में सिल्ट साफ न होने वाली माइनरों, रजवाहों में टेल तक पानी पहुंचाना टेढ़ी खीर होगी।
ज्ञानपुर पंप कैनाल से जिले के अलावा वाराणसी और प्रयागराज के कुछ क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की जाती है। चार रजवाहा और 20 से अधिक माइनरों का जाल जिले में फैला है। जिससे 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई होती है। रबी और खरीफ सीजन में सफाई के नाम पर नहरों को बंद कर दिया जाता है। इस साल अक्तूबर के शुरूआती दिनों में ही नहर बंद की गई, जिसे अब तक सफाई के नाम पर चालू नहीं किया गया। जिससे पहली सिंचाई के लिए किसान परेशान है। वहीं दूसरी ओर सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। उदाहरण के तौर पर जोरई माइनर नहर विभाग कलई खोल रहा है। सफाई के लिए लगे जेसीबी से निकाली जा रही सिल्ट को उसी में ही छोड़ दिया जा रहा है। जिससे पानी छोड़ने पर नहरों के टूटने की संभावना बढ़ जाती है। टेल तक पानी पहुंचना भी मुश्किल ही रहता है।
सपा नेता यशवंत सिंह यादव, लालू यादव, आरबी यादव, कुंवर प्रमोदचंद मौर्य, संतलाल यादव आदि की माने तो दिसंबर के अंतिम सप्ताह से नहर को चलाया जाना है और उसके पूर्व ही सफाई के नाम पर मिले लाखों रुपये गोलमाल किया जाएगा। एक्सईएन नहर वीरबहादुर सिंह ने बताया कि सिल्ट सफाई के लिए 23 लाख का बजट मिला है, जिससे मुख्य नहर समेत राजवाहा, माइनर की सफाई शुरू करा दी गई है। जरूरत के हिसाब से बजट काफी कम है। सफाई कार्य में मनमानी कर रहे ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी।