ज्ञानपुर। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना में प्रधान और सेक्रेटरी की तरफ से लापरवाही बरती जा रही है। इससे 2016-17 और 2017- 18 में स्वीकृत 450 से अधिक पीएम आवास पूर्ण नहीं हो सके। अफसरों के गले की फांस बने अपूर्ण आवासों को पूर्ण कराने की मुहिम भी पूरी नहीं हो सकी। इससे पक्के घरों में रहने की लाभार्थियों की उम्मीदें भी धूमिल हो रही हैं।
गरीबों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना लागू की है। 2016 से शुरू हुई योजना में तीन वर्षों में करीब नौ हजार 580 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए। हालांकि प्रधान की लापरवाही से 450 आवास पैसे मिलने के बाद भी अपूर्ण हैं। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5981 आवास लक्ष्य के मुकाबले सात हजार ने आवेदन किया, जिसमें 5,933 लाभार्थियों को सभी तीनों किस्त जारी हो गईं, लेकिन 150 से अधिक आवास अब भी अधूरे हैं। वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4196 लक्ष्य के मुकाबले 200 आवास अधूरे ही रह गए। वित्तीय वर्ष 2018-19 में करीब तीन हजार आवास स्वीकृत हुए, जिनमें 100 से अधिक आवास अब तक पूर्ण नहीं हो सके, जबकि एक हजार से अधिक आवास ऐसे हैं जो बन गए। उनमें लाभार्थी भी रहने लगे, लेकिन उनकी रंगाई-पुताई और अन्य व्यवस्थाएं अब तक पूरी नहीं हो सकीं। 450 आवास तो ऐसे हैं, जो आधे अधूरे ही बन सके हैं। ज्ञानपुर के सरपतहां, चौरी के चकभुईधर, डीघ ब्लॉक के डीघ, सुरियावां के जमुनीपुर अठगवां समेत दर्जन भर से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां दो से तीन आवास अधूरे रह गए हैं। मुख्य विकास अधिकारी विवेक त्रिपाठी ने कहा कि अधूरे आवास पूर्ण कराने के लिए सभी बीडीओ को निर्देश दिया गया है। जिन आवासों का पैसा जारी होने के बाद भी पूरा नहीं किया गया, वहां के प्रधान और सेक्रेटरी को नोटिस जारी करें। जरूरत पड़ने पर लाभार्थी पर विधिक कार्रवाई की जाए।