भदोही। गर्मी की छुट्टियों के बाद अब त्योहारी सीजन में ट्रेनों में बर्थ के लिए मारामारी का दौर शुरू हो गया है। रेलवे ट्रेनों में 120 दिन पहले टिकट आरक्षण शुरू करता है। हाल यह है कि तारीखें जोड़ घटाकर लोग 120 दिन पहले आरक्षण कराने के लिए आरक्षण केंद्र में पहुंच जा रहे हैं। एसी के टिकटों की मांग अधिक है। एसी के बर्थ पहले खत्म हो जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यदि त्योहारों में कहीं जाना है तो आरक्षण कराने का यही सबसे सही समय है।
आगामी दशहरा और दीपावली के मद्देनजर मुंबई, अमृतसर, नई दिल्ली, हावड़ा, सूरत, देहरादून आदि के टिकटों के लिए एक बार फिर मारा मारी होगी। ऐसे संकेत अभी से मिलने शुरू हो गए हैं। आरक्षण केंद्र से मिली ताजा स्थिति के अनुसार गोरखपुर-एलटीटी 15018 में एसी तृतीय श्रेणी में 11 दिसंबर, वाराणसी-एलटीटी सुपरफास्ट एक्सप्रेस में 14 सितंबर, अमृतसर-हावड़ा पंजाब मेल एक्सप्रेस में चार नवंबर, होावड़ा-अमृतसर पंजाब मेल एक्सप्रेस में 22 नवंबर, नई दिल्ली-पुरी नीलांचल एक्सप्रेस में 15 दिसंबर, छपरा-चेन्नई गंगा कावेरी में 10 दिसंबर से पहले के बर्थ नहीं हैं।
पूर्व में जहां स्लीपर के टिकटों की अधिक मारामारी रहती थी, लेकिन देखा जा रहा है इस वर्ष एसी के टिकट पहले खत्म हो जा रहे हैं। आरक्षण टिकटों के जो हालात हैं, उससे साफ है कि अभी से ही यात्रा टिकट बनवाना समझदारी होगी। ज्यों ज्यों त्योहार नजदीक आएंगे, बर्थ मिलना मुश्किल होता जाएगा। उधर आगामी त्योजारी सीजन का अधिक से अधिक लाभ उठाने के लिए दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। वे टिकट बुक कराने में आगे आगे हैं। बताया जाता है कि अधिकतर टिकटें वे खुद बुक करा लेते हैं और समय आने पर ऊंचे दाम में बेचते हैं।
भदोही (ब्यूरो)। भदोही रेलवे स्टेशन के आरक्षण केंद्र का आलम यह है कि तीन मे से केवल एक खिड़की से टिकट बनाया जा रहा है जिससे रेलयात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। हर रोज 8 बजे से पहले ही लोग आकर लाइन में खड़े हो जाते हैं लेकिन टिकट बनने में घटो लग जाते हैं। लोगों ने बताया कि जब आरक्षण केंद्र का शुभारंभ हुआ था, तब तीनों खिड़की से टिकट बनता था, लेकिन धीरे धीरे दो खिड़की बंद कर दिए जाने से समस्या खड़ी हो गई है। शनिवार को आरक्षण खिड़की पर लाइन में लगे राजेश यादव ने कहा कि गत वर्ष दो खिड़की थी तब भी बहुत दिक्कत थी। इस बार तो केवल एक खिड़की से टिकट बनाया जा रहा है ऐसे में आगामी दिनों क्या दिक्कतें होती समझा जा सकता है।