गुजरात के कांडला बंदरगाह से गोरखपुर तक एलपीजी गैस पाइप लाइन का कार्यभार देख रहे भूमि अध्याप्ति विभाग से कार्यदायी संस्था केजीपीएल ने अधिकार वापस ले लिया है। अब कार्यदायी संस्था की ओर से केंद्रीय टीम जिम्मेदारी संभालेगी। जिले स्तर पर कार्यरत विभाग से अधिकार हटने पर अधिग्रहण से प्रभावित किसानों में मुआवजा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि देश में टैंकरों से होने वाली गैस की ढुलाई पर रोक लगाने के लिए गुजरात के कांडला बंदरगाह से गोरखपुर तक गैस पाइपलाइन बिछाने का कार्य पश्चिमी देशों से शुरू भी हो चुका है। कुल 1083 किलोमीटर लंबी उक्त पाइप लाइन कई राज्यों और उत्तर प्रदेश के 18 जिलों से होकर ही गोरखपुर तक पहुंचेगी होगी। कलेक्ट्रेट स्थित भूमि आधिपत्य विभाग के निरीक्षक नागेंद्र प्रसाद ने बताया कि तहसील भदोही से 40 और तहसील ज्ञानपुर से चार कुल 44 गांवों से होकर पाइप लाइन के लिए सात हजार किसानों की जमीन का अधिगृहीत होनी है। इसके लिए प्रभावित किसानों को नोटिस भी जारी हो चुका है। गत वर्ष मामला तूल पकड़ने पर दो हजार किसानों ने आपत्ति भी दर्ज कराई है। जब तक प्रक्रिया पूर्ण होती, इसी बीच कार्यदायी संस्था ने यह पत्र जारी कर विभाग से अधिकार ले लिया है। अब केंद्रीय टीम सभी औपचारिकताएं निभाएगी।