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ठेकेदार समेत आरएफसी लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज

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ज्ञानपुर। एआरटीओ का फर्जी हस्ताक्षर और मुहर लगाकर गाड़ी के पंजीकरण के आधार पर खाद्य एवं रसद विभाग से डोर स्टेप डिलिवरी का टेंडर हासिल करने के आरोप में एक ठेकेदार और विभाग के लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। रविवार देर रात खाद्यान्न आपूर्ति करने वाली फर्म लैपटॉप केयर के प्रोपराइटर कृष्ण कुमार तिवारी और आरएफसी कार्यालय मिर्जापुर के निविदा लिपिक राजकुमार तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद फर्जीवाड़ा करने वालों में खलबली मच गई है।
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दो माह पूर्व ऊंज के ठेकेदार विनीत सिंह ने एसपी को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया था कि लैपटॉप केयर के प्रोपराइटर गोपीगंज थानाक्षेत्र के आनापुर गांव निवासी कृष्ण कुमार तिवारी ने डोर स्टे डिलीवरी स्टेज-2 का टेंडर परिवहन विभाग, बैंक यूटीआर नंबर, हैसियत प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, वाहनों की संख्या फर्जी ढंग से दर्शाकर हासिल किया है। मंडलीय और जिला कार्यालय तक निविदा के नाम पर हो रहे फर्जीवाड़े की शिकायत पर एसपी रामबदन सिंह ने एएसपी आरके वर्मा को जांच सौंप दी। दो माह तक एएसपी ने जांच के बाद फर्जीवाड़ा को सही पाते हुए मुकदमा दर्ज करने की संस्तुति की।
आरोप है कि टेंडर हासिल करने के लिए कई पायदान पर फर्जीवाड़ा किया गया है। इसमें एआरटीओ के फर्जी हस्ताक्षर, मुहर से दूसरे वाहन का पंजीकरण दिखाने से लेकर जिलाधिकारी से जारी चरित्र प्रमाण पत्र जारी तिथि और वैधता दिनांक तक फर्जी लगाने का आरोप है। इसके बाद रविवार देर शाम ठेकेदार, लिपिक और इस गिरोह के अज्ञात लोगों के खिलाफ तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। खास बात यह कि फर्जी कागजातों और विभागीय मिलीभगत से टेंडर हासिल कर आरोपी ठेकेदार ने दो माह तक खाद्यान्न की डिलीवरी भी ब्लॉक स्तरीय हाट गोदामों से कोटे की दुकानों तक की है। आरोप है कि वित्तीय वर्ष 2019-20 में भी आरएफसी कार्यालय मिर्जापुर और विपणन कार्यालय भदोही में तैनात अधिकारियों-कर्मचारियों ने उसी व्यक्ति को बार-बार लाभ दिलाने का प्रयास किया।
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चार और अधिकारी आ सकते हैं लपेटे में
ज्ञानपुर। वित्तीय वर्ष 2020 से 22 तक के लिए होने वाले डोर टू स्टेप डिलिवरी स्टेज-2 में फर्जीवाड़े के आरोप में नामजद दो आरोपियों के अलावा चार और प्रमुख अधिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी पुलिस-प्रशासन कर रहा है। पुलिस सूत्रों की मानें तो मिर्जापुर और भदोही के चार अधिकारियों के खिलाफ जांच अंतिम दौर में है। जांच के घेरे में आने वाले उक्त अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर टेंडर में गड़बड़ी से लेकर सड़े-गले खाद्यान्न की आपूर्ति, बीच रास्ते में ट्रकों से अनाज की बोरियां गायब कराने, नियुक्ति आदि को लेकर पूर्व से ही सवाल उठते रहे हैं।
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