शाम ओपन थिएटर में आयोजित समारोह में ऊलसेफ की प्रबंध निदेशक डा.एग्नेस सेडनाय ने कहा कि कालीन रखरखाव में व्यापक संभावनाएं हैं।
यहां के लोग अच्छे लगे। उन्होंने पूरी तन्मयता से कार्यशाला में भाग लिया और जानकारियां हासिल की। समारोह के बाद छात्र-छात्राओं ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम पेश कर मेहमानों का दिल जीतने का प्रयास किया।
उन्होंने कहा कि कालीनों के बड़े उत्पादक के साथ मिल कर कालीनों के रखरखाव पर कार्यक्रम करना बेहद उत्साहवर्धक रहा। जिन लोगों ने भाग लिया उनसे चीजें बांटने में अच्छा लगा।
आवश्यक हुआ तो हम लोग पुन: भारत आएंगे। बतौर मुख्य अतिथि प्रमुख कालीन निर्यातक भोलानाथ बरनवाल ने कहा कि किसी कालीन उत्पादक के लिए कालीन बनाना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका रखरखाव कर पाना। कहा कि बीते सप्ताह हम लोगों ने यहां जो कुछ सीखा और जाना उलसेफ के बगैर कल्पना नहीं की जा सकती थी।
अतिथियों के साथ आए भारतीय मूल के प्रो.किम गांधी ने आईआईसीटी छात्रों को बताया कि वे विश्व के एकमात्र कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान में अध्ययनरत हैं। इसका लाभ उठाएं। छात्रों को सफलता के गुण भी दिए।
निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने बताया कि कार्यशाला में शामिल हुए 50 लोगों को आज प्रशस्ति पत्र दे दिया गया। अंत में आईआईसीटी छात्रों चांदनी राय, दीपशिखा, अनूप कुमार, मुकेश डोगरा, गुलाब, निवेदिता जायसवाल, शिवांगी पांडेय ने गीत नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का दिल जीत लिया। शिक्षक एनएन दास व बीडी दीक्षित ने भी गीत सुनाए। शिरजा सिन्हा और रोहित पिल्ला ने संचालन किया।