कड़ाके की ठंड से राहत नहीं मिल पा रही है। सोमवार को बर्फीली हवाओं से समूची कालीन नगरी शीतलहर की चपेट में आ गई। इससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सुबह से लेकर शाम तक चली हवाओं से लोग अलाव के आसपास ही दिखे। हल्की धूप भी राहत नहीं दे सकी। हालांकि फसलों के लिए यह फायदेमंद बताई जा रही है।
साल के शुरूआत से ही मौसम बिगड़ा हुआ है। पहले कोहरे तो बाद में बारिश संग एक सप्ताह बारिश से लोग परेशान रहे। अब शीतलहर ने ठिठुरन बढ़ा दी है। गलन का हाल यह है कि लोग गर्म कपड़ों से लदे होने के बाद भी ठिठुरते देखे जा रहे हैं। मजदूरी पेशा से जुड़े लोग काम करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। सोमवार को सुबह 10 बजे हल्की धूप खिली, लेकिन उसके बाद धूंध से वह भी बेअसर सा हो गया। न्यूनतम तापमान 8.2 से बढ़कर 9.5 पहुंचा, लेकिन अधिकतम तापमान 16.8 से 16.6 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। तीन दिनों से अधिकतम तापमान 16 से 17 के बीच ही बना हुआ है। इसमें 10 किमी प्रति घंटे से चल रही बर्फीली हवाओं ने लोगों केे हिलाकर रख दिया है। मौसम विशेषज्ञ सर्वेश बरनवाल का कहना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी और पिछले दिनों हुई बारिश से शीतलहर जैसी स्थिति बन गई है। यह स्थिति आने वाले एक सप्ताह तक बनी रहेगी। चिकित्सक डॉ. अनिल श्रीवास्तव ने ऐसे मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को विशेष बचाव की सलाह दी है। उनका कहना है कि ठंड और गलन के बीच खिल रही धूप के समय लोगों को बेहद सावधानी बरतने की जरूरत है। सर्द हवाओं से शीत लगने की संभावना बढ़ जाती है।