फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Bhadohi News: बीते साल के मुकाबले इस साल 1939.84 करोड़ घटा कालीन कारोबार

विज्ञापन
विज्ञापन
सीईपीसी की ओर से जारी आंकड़े के मुताबिक बीते साल की अपेक्षा कालीन निर्यात घट गया है। वित्त वर्ष 2021-22 के मुकाबले 2022-23 में कालीन कारोबारियों को 1939.84 करोड़ का घाटा हुआ है। यह कालीन उद्यमियों और सरकार के लिए चिंता का विषय है। जनपद में सम्पन्न हुए अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले के बाद भारतीय कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की ओर से जारी आंकड़े चौंकाने वाले हैं। हालांकि अगर बीते पांच सालों के आंकड़ों पर गौर करेंगे तो यह काफी उतार-चढ़ाव वाला है।
विज्ञापन

जिले के मखमली कालीनों की मुरीद पूरी दुनिया है। भारत के कालीन कारोबार में भदोही की हस्तनिर्मित कालीनों की बड़ी भागीदारी है। बताया जाता है कि पूरे भारत से जितना कालीन निर्यात होता है। उसमें 60 फीसदी हिस्सेदारी जिले की ही होती है। ऐसे में कालीन कारोबार में उतार-चढ़ाव का सीधा असर जिले के कालीन निर्यातकों को होता है। सीईपीसी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक सन् 2021-22 में पूरी दुनिया में भारत का कालीन कारोबार 16640.26 करोड़ रुपये था, लेकिन इस साल वह 1939.84 करोड़ घट कर 14700.42 करोड़ रह गया है। भारत के कालीन कारोबार पर अगर बीते पांच साल उतार-चढ़ाव भरा रहा है। डायरेक्ट्री के अनुसार 2018-19 में 12364.68 करोड़, 2019-20 में 11799.46 करोड़, 2020-21 में 13810.41 करोड़, 2021-22 में 16640.26 करोड़ तथा वित्त वर्ष 2022-23 में 14700.42 करोड़ रहा। इन आंकड़ों से यह साफ है कि कोरोना काल के भयावह समय में भी भारत का कालीन कारोबार शानदार रहा और पांच सालों के शीर्ष पर रहा। वहीं 2022-23 में जब सारी चीजें पटरी पर लौट आई हैं। ऐसे समय में भारत का कालीन कारोबार अप्रत्याशित रूप से 1939.39 करोड़ रुपये घट गया। हालांकि कालीन निर्यातक इसके लिए वैश्विक हालात को जिम्मेदार मान रहे हैं। निर्यातकों का कहना है कि रूस यूक्रेन युद्ध से काफी फर्क पड़ा है।


कोरोना काल में बंदी के दौरान घरों पर काम करने की छूट थी। इससे उत्पादन पर असर नहीं पड़ा। वैश्विक मांग बरकरार रहने से इस दौरान देश का कालीन निर्यात शीर्ष पर जा पहुंचा। अभी भी निर्यात के शिखर पर ही थे कि रूस युक्रेन युद्ध शुरू हो जाने और उसमे अमेरिका और रूस तथा युरोप पर खासा असर पड़ने से लक्जरी आईटमों की मांग का पूरी दुनिया पर असर पड़ा। अब हमारे सामने मौजूदा निर्यात को बचाने की चुनौती है, जो केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार की पहल से बचाया जा सकेगा। -दर्पण बरनवाल, सदस्य प्रशासनिक समिति सीईपीसी (फोटो-23)
विज्ञापन




हाल ही में समाप्त हुए इंडिया कारपेट एक्सपो में आए मुख्यमंत्री ने हम लोगों को न केवल प्रोत्साहित किया, बल्कि उन्होंने हम लोगों से उद्योग की बेहतरी के लिए प्रस्ताव भी मांगे हैं। जिसे तैयार किया जा रहा है। मुझे पूरा विश्वास है कि अब प्रदेश सरकार प्रदेश के कालीन निर्यात को बढ़ाने के लिए पहल की है और निश्चित रूप से कुछ नया होगा। इसलिए कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में अकेले उत्तर प्रदेश देश के कालीन निर्यात को संभालने का काम करेगा। -असलम महबूब, सदस्य प्रशासनिक समिति सीईपीसी (फोटो-24)
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें