सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोपीगंज का भवन अंतत: दो दशक बाद अतिक्रमण मुक्त हो गया। स्वास्थ्य विभाग के ही कुछ कर्मचारी आवासीय भत्ता लेने के बाद भी सरकारी भवन में निवास बना लिए थे।
दरअसल अधिवक्ता आदर्श त्रिपाठी ने सीएचसी में तैनात फार्मासिस्ट, एएनएम और कर्मचारी को लेकर सीएमओ को प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें आरोप लगाया था कि एचआरए लेने के बाद भी तथ्य छिपाकर अस्पताल भवन में कब्जा किए हैं। सीएमओ के निर्देश पर सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशुतोष पांडेय ने जांच की जिसमें मौके पर कब्जा मिला। तीन नोटिस के बाद भी भवन को खाली नहीं किया गया। कमरा खाली न करने पर सीएमओ डॉ. संतोष चक ने स्टाफ नर्स का वेतन रोककर विधिक कार्रवाई की चेतावनी दी। जिसके बाद 28 जनवरी को सभी ने भवन को खाली कर दिया। बताते चलें कि स्वास्थ्य ही नहीं कृषि, तहसील सहित अन्य विभागों के कई कर्मचारी आवासीय भत्ता लेने के बाद भी सरकारी भवनों में रहकर राजस्व का चूना लगा रहे हैं।