जिले में नहर और नलकूप की नालियां ध्वस्त होने से धान की रोपाई संग अन्य खेती पर संकट खड़ा हो गया है। मानसून की अच्छी बारिश न होने से 60 फीसदी भी रोपाई अब तक नहीं हो सकी है। नालियां न बनने से हर साल 500 हेक्टेयर रकबे में खेती नहीं हो पाती। निजी पंपिंगसेट के सहारे किसान फसल तैयार करते हैं।
कृषि प्रधान देश में किसानों के हित को लेकर केंद्र और प्रदेश सरकार कई योजनाएं चला रही हैं, लेकिन धरातल पर अधिकतर किसान वंचित रह जाते हैं। मानसून के अलावा नहर और राजकीय नलकूप सिंचाई के मुख्य साधन हैं। खरीफ-रबी और जायद सीजन में किसान धान, गेहूं, तिलहन, दलहन संग सब्जी आदि की खेती करते हैं। जिले में छह रजवाहा, 12 माइनर और एक मुख्य नहर है। जिससे करीब 15 हजार हेक्टेयर की सिंचाई होती है। खेतों तक पानी पहुंचने के लिए नहरों से एक दशक पूर्व 700 से अधिक नालियां बनाई गईं थीं। मरम्मत न होने से अधिकतर नालियां टूट चुकी हैं और कुछ अतिक्रमण के कारण ध्वस्त हो चुकी हैं। 525 राजकीय नलकूपों से भी 10 हजार हेक्टेयर की खेती होती है। नलकूपों की भी अधिकतर नालियां देखरेख न होने से टूट चुकी हैं। जिससे खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता।
तहसील औराई, ज्ञानपुर, भदोही में कार्यरत राजस्व विभाग ने नालियों को खेत पहुंचाने के लिए सीमांकन किया लेकिन ठेकेदारों ने निर्माण में मानक में अनियमितताएं बरत कर पुन:पीछे मुड़कर नहीं देखा कि करोड़ों रुपये खर्च होने का लाभ किसान ले रहे हैं या नहीं। डीघ के दरवांसी निवासी किसान निर्भय सिंह, सोनपुर-कटरा के लालू यादव, कोइरौना-मझगवां के आरबी यादव, रजमला के अमरजीत, गोधना के होरीलाल यादव, अभोली के रामचंद्र बिंद, सुरियावां के कृष्णमोहन, औराई नटवां-बंजारी निवासी बिनोद कुमार आदि ने बताया कि सिंचाई व्यवस्था डांवांडोल होने से अभी तक 60 फीसद तक धान की रोपाई संभव नहीं हो सकी है। 40 फीसद रोपाई कराने वालों में निजी पंपिंगसेट, मिनी नलकूप लगाने वाले और नहर, राजकीय नलकूपों के आसपास सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था मिलने पर राहत पाया है। हर साल करीब 500 हेक्टेयर रकबे में खेती नहीं हो पाती।
सुधवैं, मैलौना, चंदापुर, रामकिशुनपुर-बसहीं, नवधन, ऊंज, कुरमैचा, दरवांसी, कुलमनपुर, महुआरी, जंगलपुर, बड़ागांव, गोलखरा, सदाशिवपट्टी, मोन-कुटिया, बारीपुर, इटहरा, दुगुना, सूफीनगर-गोधना में नाली, बाहा, खोही पर अतिक्रमण से किसान परेशान रहते हैं। किसान बंधु की बैठकों में उठने वाली आवाज पर कभी सख्त कदम नहीं उठ सका। एक्सईएन नलकूप संजय भारती ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। बजट के लिए शासन को लिखापढ़ी की जा चुकी है। एक्सईएन नहर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि पांच वर्ष पहले नाली की जिम्मेदारी विभाग के पास थी जिसे हटाकर शासन ने ब्लॉक स्तर पर कर दिया है। ग्रामसभा के प्रस्ताव पर किसानों की समस्या दूर हो सकती है।