डीघ ब्लाॅक के बेरवा पहाड़पुर गांव में तालाब पर बने इंटर कॉलेज और महाविद्यालय को तहसीलदार की अदालत ने गिराने का आदेश दिया है। इसे लेकर कॉलेज प्रशासन में खलबली मच गई है। कोर्ट ने बेदखली के साथ ही 5.30 लाख का जुर्माना भी लगाया है।
आरटीआई कार्यकर्ता मुनीश पांडेय ने कुछ साल पूर्व शिकायत दर्ज कराई थी कि बेरवा पहाड़पुर में तालाब पर इंटर कॉलेज और महाविद्यालय का निर्माण किया गया। उक्त मामले की जांच क्षेत्रीय लेखपाल ने की। उसके बाद न्यायालय तहसीलदार कोर्ट में वाद दाखिल किया गया। लेखपाल की रिपोर्ट में यह कहा गया कि बेरवा पहाड़पुर की अलग-अलग आराजी संख्या जो तालाब में दर्ज है, जिस पर 15 साल से एक कॉलेज, बाउंड्रीवाल, पंपिगसेट और कमरा बनाकर अवैध तरीके से कब्जा किया गया है।
विपक्षी के खिलाफ नियमानुसार आरसी प्रपत्र 20 जारी किया गया, लेकिन प्रतिवादी की ओर से कई तिथि बीतने के बाद भी कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। न ही नियत तिथि को न्यायालय में उपस्थित हुए। इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी की मंशा मात्र मुकदमें को लंबित रखना है।
प्रतिवादी के अनुपस्थित रहने की दशा में सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता राजस्व ने तर्क दिया कि प्रश्नगत भूखंड अभिलेख में तालाब के खाते में अंकित है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में इसका लाभ किसी को नहीं दिया जा सकता। तहसीलदार कोर्ट ने प्रतिवादी प्रबंधक और समिति बेरवा पहाड़पुर को बेदखल करने का आदेश दिया। मुकदमें में प्रतिवादी पर पौने पांच लाख जुर्माना भी लगाया।
तालाब की नापी करने पहुंची राजस्व टीम
घोसिया के जयरामपुर में 27 बीघा तालाब की पैमाइश के लिए मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम पहुंची। इस दौरान पक्का तालाब, मंदिर, कब्रिस्तान समेत सरकारी जमीन के रकबे को देखा। तहसील दिवस पर जिलाधिकारी विशाल सिंह को पत्रक देकर तालाब की निशानदेही करते हुए अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी। जिसे संज्ञान में लेते हुए एसडीएम बरखा सिंह की ओर से गठित टीम ने तालाब पर उपस्थित होकर निशानदेही शुरू की। इस मौके पर राजस्व निरीक्षक मनोज कुमार मिश्रा, लेखपाल आनंद कुमार यादव, अरुण कुमार भारती, रविंद्र प्रताप, राजेश वर्मा आदि रहे।