इस दौरान प्रशासन ने बुलडोजर से लगभग 40 मकान ढहा दिए। इससे बस्ती में खलबली मच गई।
कुछ लोगों ने विरोध के स्वर भी उठाने का प्रयास किया, लेकिन बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स की मौजूदगी के चलते किसी की एक न चली।
अदालत से स्टे होने के कारण प्रशासन ने दो मकान, दो विद्यालय, एक पंचायत भवन और एक सोसाइटी के जर्जर भवन को खाली नहीं कराया।
बुधवार को सुबह दस बजे के आसपास अचानक औराई एसडीएम मनोज कुमार, सीओ देवेश शर्मा, राजस्व टीम और पुलिस फोर्स के साथ बुलडोजर लेकर पहुंचे।
इससे गांव के लोगों में हड़कंप मच गया। जमीन पर काबिज लोगों ने इसका विरोध करना चाहा, लेकिन प्रशासन के साथ औराई, चौरी थानों की पुलिस के अलावा, महिला पुलिस और बड़ी संख्या में पीएसी देखकर पीछे हट गए। इसके बाद राजस्व टीम ने चिन्हित किए गए मकानों को एक-एक कर धराशायी कर दिया। यह कार्रवाई सुबह से लेकर देर शाम तक चली।
प्रशासन की टीम ने अतिक्रमण ढहाकर चारागाह को मुक्त करा दिया। एसडीएम ने बताया कि अतिक्रमण हटवाने की कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश पर की गई है।
प्रशासन की टीम के साथ औराई एसओ सत्येंद्र यादव, चौरी के प्रभारी एसओ शिव शंकर सिंह भी मयफोर्स मौजूद रहे। बुलडोजर चलाकर अतिक्रमण खाली कराने से पीड़ितों परिवार की महिलाएं, बच्चे आशियाना जमींदोज होते देख रोने लगे।
मकान गिरने के साथ रोने-चिल्लाने की आवाज भी सुनाई दे रही थी। चारागाह की जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई गांव निवासी अमरनाथ बिंद की हाईकोर्ट में दी गई याचिका पर हुए आदेश के आधार पर की गई। उन्होंने पहले प्रशासन से शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
इनसेट
12 परिवार खुले आसमान के नीचे
चौरी। बहुतरा खुर्द गांव में चारागाह की जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन की ओर से चलाए गए बुलडोजर के बाद लगभग दर्जनभर परिवार खुले आसमान के नीचे आ गए। जबकि दो दर्जन से अधिक बाशिंदों के पूर्व में कहीं न कहीं अतिरिक्त ठिकाने थे। जहां पर उन्होंने अतिक्रमण हटते ही शरण ले ली। वहीं इनमें एक दर्जन लोग ऐसे हैं जिनके पास बिल्कुल जमीन नहीं है। ऐसे परिवार प्रशासन की कार्रवाई पर मायूस हो गए। उनके घर के बच्चे, जवान से लेकर बुजुर्ग और पशु-पक्षी ठंड में बाहर ही परेशान होते रहे।
बिना समय दिए खाली कराने का आरोप
चौरी। हाईकोर्ट के आदेश पर प्रशासन की ओर से अतिक्रमण खाली कराने पर बेघर हुए लोगों ने गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने प्रशासन पर समय न देने का आरोप लगाया। कहा कि उन्हें रहने का वैकल्पिक इंतजाम करने के लिए समय नहीं दिया गया।
अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई के बाद बेघर हुए लालजी पटेल और मुख्तार अहमद ने आरोप लगाया कि एक दिन पूर्व ही उन्हें मकान ढहाने की सूचना दी गई थी। वह आशियाने का प्रबंध करने में जुटे थे, लेकिन समय कम होने से व्यवस्था नहीं हो सकी। अब समस्या बढ़ गई है।
पारस प्रजापति, और गंगाराम का कहना है कि मकान ढहाने से पूर्व थोड़ा और समय मिल गया होता तो उनका हजारों का नुकसान न होता। आरोप लगाया कि राजस्व कर्मियों ने मकान ढहाने के लिए गंभीरतापूर्वक जानकारी नहीं दी थी। इससे वे गफलत में रह गए। कुछ इसी तरह ताड़कनाथ, सपना किन्नर और सतून ने भी प्रशासन पर भड़ास निकाली। जबकि इस संबंध एसडीएम मनोज कुमार का कहना है कि प्रशासन की ओर से तीन दिन से अतिक्रमण हटवाने की सूचना दी जा रही थी।