भोरी-महजूदा गांव में कजरी के मेले में जुटी महिलाएं। संवाद
सुरियावां। क्षेत्र के भोरी-महजूदा गांव में सोमवार को सदियों पुरानी परंपरा निभाई गई। गांव के ऐतिहासिक कजरी मेले में सैकड़ों की संख्या में जुटी महिलाओं ने कजरी गायन कर प्रतीकात्मक झगड़ा किया। इस झगड़े में न तो कोई मारपीट हुई और न ही कोई थाना-मुकदमा। बस एक-दूसरे पर व्यंगों के ऐसे बाण चले। जिससे देखने के लिए हजारों महिलाएं जुटी। इस मेले की खास बात रही कि पुरुष इससे दूर रहे।
भोरी-महजूदा की कजरी अपनी अनूठी परंपरा के लिए पूर्वांचल में खास पहचान रखती है। कजरी के दिन दोनों गांवों की महिलाएं कजली गायनकरती है। एक-दूसरे से पारंपरिक अंदाज में उलझती हैं। लोक कथाओं और किंवदंतियों के अनुसार इस परंपरा की शुरुआत तेरहवीं शताब्दी में राजा भरो के शासनकाल से हुआ है। बताया जाता है कि भरो ने अपनी राजधानी सुरियावां को बनाया था। इसी क्षेत्र में भोरी-महजूदा गांव स्थित हैं। कजरी मेले के आयोजन के कारण भोरी गांव के इस पुरवे को कजरहवा के नाम से भी जाना जाता है। कजली गायन के दौरान महिलाओं के बीच पारंपरिक नोकझोंक देखने को मिली। दूसरी तरफ मेले में सुरक्षा की दृष्टिगत व्यापक इंतजाम किए गए थे। प्रभारी निरीक्षक सुरियावां अश्वनी त्रिपाठी के नेतृत्व में करीब दो दर्जन सब इंस्पेक्टर, 20 महिला कांस्टेबल समेत कुल 114 पुलिसकर्मियों की तैनाती रही। महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में कजली गायन स्थल पर भी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की गई। वहीं मेले में बच्चे और किशोरियों ने मेले का जमकर लुफ्त उठाया। किशोर-किशोरियों ने चाट, पकौड़े का आनंद लिया। वहीं बच्चों ने झूला झूला।