भाजपा के समर्थन वापस लेने से विधायक के भाई अनिरुद्ध त्रिपाठी को वाकओवर मिल गया। अब उनका अध्यक्ष बनना करीब-करीब तय है। तीन जुलाई को अध्यक्ष पद के लिए मतदान होना है। माना जा रहा है कि तीन जुलाई को सिर्फ औपचारिकता बाकी रह गई है। बताते चलें कि 1994 में जनपद सृजन के बाद 1995 में जिला पंचायत का गठन हुआ। वर्ष 2010 से 2012 में बसपा की श्यामला सरोज को छोड़ दिया जाए तो 23 साल तक अध्यक्ष की कुर्सी पर सपा का ही कब्जा रहा। सपा प्रत्याशी श्याम कुमारी की ओर से नामांकन न करने का भी फायदा भाजपा विधायक के भाई को मिल रहा है।