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आयुष्मान भारत: 13 हजार को गोल्डेन कार्ड का इंतजार

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ज्ञानपुर। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान भारत योजना को लागू होने के एक वर्ष होने वाला है, लेकिन अब भी 13 हजार लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड का इंतजार है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि गांव-गांव कैंप लगा कर कार्ड बन रहे हैं,लेकिन हकीकत इससे जुदा है। 11 माह आठ दिन में 3213 लोगों ने योजना के तहत विभिन्न अस्पतालों में अपना उपचार कराया।
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विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना आयुष्मान भारत में जिले के 94 हजार 867 लोगों का चयन किया गया है। 23 सितंबर 2018 को शुरू हुई योजना में आयुष्मान कार्ड बनने के तीन माह बाद पीवीसी गोल्डन कार्ड लाभार्थियों को वितरण के लिए आए थे। करीब आठ माह से अधिक समय गुजरने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा सभी लाभार्थियों को गोल्डेन कार्ड नहीं पहुंचा सका। कई लाभार्थियों के कार्डों पर नाम और शहर का नाम तो है, लेकिन मोहल्ले का नाम नहीं है। ऐसे में शहरों में लाभार्थी का पता ढूंढना मुश्किल हो रहा है। 13 हजार गोल्डेन कार्ड लाभार्थियों तक न पहुंचाने के बाद भी वितरण में जिला सूबे में चौथे स्थान पर है। विभागीय सूत्रों की माने तो इस योजना का लाभ लोगों तक पहुंच रही है। कई ऐसे लाभार्थी रहे जो आर्थिक रूप से कमजोर रहे। वे रोते हुए अस्पताल में गए लेकिन चंद दिनों में खुश होकर बाहर निकले। जिले में दो सरकारी समेत 22 अस्पतालों का चयन हुआ है। जिसमें हड्डी रोग, पेट, लीवर समेत अन्य बीमारियों के अलग-अलग अस्पताल शामिल हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी सिंह ने कहा कि गांव-गांव कैंप लगा कर कार्ड का वितरण हो रहा है। तीन महीने चुनाव के चलते कार्ड का वितरण नहीं हो सका था।
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