ज्ञानपुर। जिले में आंगनवाड़ी केंद्रों की हालत दयनीय हो चुकी है। करीब एक से डेढ़ दशक बाद 1483 केंद्रो में 859 में बिजली नहीं पहुंच सकी तो 439 में पेयजल की सुविधा मयस्सर नहीं है। आलम यह है कि 628 केंद्रो पर शौचालय की व्यवस्था नहीं हो सकी है। जिससे केंद्रो पर पंजीकृत जीरो से पांच वर्ष के करीब 50 हजार से अधिक बच्चों को कठिनाइयों से जूझना पड़ता है।
शिशु एवं मातृ मृत्यु दर रोकने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चलाई जा रही है। इसके लिए बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की ओर से हर गांव में आंगनवाड़ी केंद्र संचालित है। केंद्रो पर पोषाहार, दवाएं देने के साथ ही खेल-खेल में बच्चों को पढ़ाया भी जाता है। करीब एक से डेढ़ दशक पूर्व से चल रहे आंगनवाड़ी केंद्रो पर सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों रूपये खर्च होते हैं लेकिन मूलभूत जरूरतें आज भी मयस्सर नहीं हो सकी। विभागीय आंकड़ो पर गौर किया जाए तो 1483 आंगनवाड़ी केंद्रो पर 2800 आंगनवाड़ी और सहायिका तैनात हैं। एक दशक के बाद भी केंद्रो को अपना भवन नसीब नहीं हो सका। 747 केंद्र प्राथमिक विद्यालय के भवन में चल रहे तो 174 पंचायत भवन में चल रहे हैं। 313 खुद के भवन में तो 249 किराए के कमरे में चलाए जा रहे हैं। केंद्रो की बदहाली का आलम यह है कि जीरो से पांच वर्ष तक के बच्चों को हवा पानी तक के लिए तरसना पड़ता है। 1483 आंगनवाड़ी केंद्रो में 439 में पेयजल की व्यवस्था नहीं है तो 628 में शौचालय की सुविधा नहीं है। 859 में तो बिजली का कनेक्शन तक नहीं है, जिससे उमस और गर्मी में बच्चों को परेशान होना पड़ता है।
सभी सीडीपीओ से बिजली, पानी और शौचालय विहीन केंद्रो की सूची मांगी गई है। समस्या को लेकर जिलाधिकारी को अवगत कराया गया है। सभी केंद्रो पर एक से दो माह में व्यवस्थाएं पूरी की जाएगी।
राजीव कुमार सिंह, डीपीओ