ज्ञानपुर। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में बने एक कक्षीय भवन और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में बने इनसीनरेटर का काम तकनीकी टीम परखेगी। दो शिक्षा सत्रों में 35 लाख की लागत से कार्य हुए हैं। सीडीओ विवेक त्रिपाठी के निर्देश पर शिक्षा विभाग की ओर से तकनीकी टीम का गठन किया जाएगा, जिसमें निर्माण कार्य से जुड़े तीन अवर अभियंता शामिल होंगे।
जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाली किशोरी छात्राओं के लिए शासन से नैपकीन की व्यवस्था की गई थी, जिससे छात्राओं को स्कूल में पठन-पाठन के दौरान कोई समस्या न हो। उन नैपकीन का निस्तारण करने के लिए स्कूलों में ही इनसीनरेटर बनाने के लिए प्रति स्कूल आठ-आठ हजार रुपये भेजे गए थे। वर्ष 2017-18 और 2018-19 में 114 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में इनसीनरेटर के लिए नौ लाख 12 हजार दिया गया, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में सात एक कक्षीय भवन के लिए 26 लाख 40 हजार जारी किया गया। एक कक्षीय भवन का निर्माण हुआ, लेकिन कई स्कूलों में इनसीनरेटर के बजाए गड्ढा खोद कर ही पैसा हजम कर लिया गया। कुछ माह पूर्व परियोजना कार्यालय के अधिकारियों ने जांच की, लेकिन उच्चाधिकारी इससे संतुष्ट नहीं हुए। शिक्षा विभाग की ओर से टीम गठित की गई, लेकिन उसमें तकनीकी विशेषज्ञ न होने से मुख्य विकास अधिकारी गठित कमेटी को निरस्त कर दूसरी कमेटी गठित करने का निर्देश दिया। शिक्षा विभाग की ओर से आरईएएस, लोक निर्माण विभाग के तीन अवर अभियंताओं की टीम बनाई जा रही है। यह टीम 114 पूर्व माध्यमिक विद्यालय और सात प्राथमिक विद्यालय में जाकर जांच करेगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि सीडीओ के निर्देश पर टीम गठित की जा रही है। जल्द ही जांच करा कर रिपोर्ट दी जाएगी।