ज्ञानपुर। जिले में सिंचाई के अहम साधनों में शामिल राजकीय नलकूपों की हालत खराब है। कुछ नलकूप तकनीकी खामी से बंद हैं तो कइयों की नालियां ध्वस्त होने से हर खेत तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है। आलम यह है कि चार हजार 565 हेक्टेयर खेत असिंचित रह जाते हैं। शिकायतों के बाद भी न तो विभाग ध्यान देता है और न ही प्रशासन। जिससे निजी पंपिग सेट से किसान पैसे देकर सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं।
कृषि प्रधान देश में 70 से 80 फीसदी खेती मानसून, नहर और नलकूप पर ही निर्भर रहती है। जिले में एक लाख तीन हजार हेक्टेयर के रकबे में 69 हजार हेक्टेयर में खेती की जाती है, जिसमें 59 हजार हेक्टेयर सिंचित है। जिले में सिंचाई के लिए नहरों का जाल फैलाने के साथ ही ग्रामसभाओं में 584 राजकीय नलकूप स्थापित कराए गए। दो से तीन दशक पूर्व स्थापित राजकीय नलकूपों में 200 से 250 की नालियां या तो ध्वस्त हो चुकी हैं या उस पर अतिक्रमण कर लिया गया है। जिससे कभी दो से तीन किलोमीटर के परिक्षेत्र में सिंचाई का मुख्य साधन रहने वाले राजकीय नलकूप 500 मीटर के दायरे तक ही सिमट कर रह गए हैं। हर खेत तक पानी न पहुंचने से किसानों को निजी पंपिग सेट से धान, गेहूं समेत अन्य फसलों की खेती करनी पड़ती है। नलकूप विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में आठ हजार 650 हेक्टेयर के रकबे को नलकूप से सिंचित किया जाता है, लेकिन नालियां ध्वस्त होने से साढ़े चार हजार हेक्टेयर रकबे की सिंचाई नहीं हो पाती। कई राजकीय नलकूप महीनों से बंद है, लेकिन उसकी मरम्मत नहीं की जा रही है। विभाग का दावा है कि 12 राजकीय नलकूप बंद है जबकि हकीकत इससे कहीं अधिक है। अधिशासी अभियंता नलकूप नंदलाल ने बताया कि विभाग की ओर से टूटी नालियों को दुरुस्त कराया जाता है। शासन से कम बजट मिलने से सभी को सुधारा नहीं जा सका। जैसे-जैसे पैसा आ रहा है उसे सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।