नौटंकी की हास्य कला मंचन देखकर दर्शक भी मंत्रमुग्ध हो गए। इस दौरान मुख्य अतिथि डीआईओएस ने नौटंकी परंपरा की विरासत सहेजने के लिए आयोजक की सराहना की।
नौटंकी का निर्देशन राजकुमार के पुत्र ऋतुराज श्रीवास्तव, सह निर्देशन जितेंद्र समेत व्यवस्थापक में दिलीप, जयप्रकाश, अशरफ अली, अब्दुल कलीम,मो. हमीद, दान बहादुर, अमित आदि रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ.ओम प्रकाश गुप्ता ने किया। उन्होंने लुप्त होती जा रही नौटंकी परंपरा, विरासत सहेजने के राजकुमार श्रीवास्तव के प्रयास की सराहना की।
उन्होंने कहा कि लोकविधाएं हमारे देश की पहचान है। विभिन्न समस्याओं के समाधान में लोक विधाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसे माध्यमिक, बेसिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल कराने के लिए प्रयास करने का आश्वसन दिया। कार्यक्रम का संचालन उस्मान और स्वर संयोजन सुशील विश्वदीप, प्रकाश सुजाय ने किया। कलाकारों में कुल दीप सिंह, लैस बाबू, जगदीप, प्रदीप, दर्शनलाल, मोनू, भोलानाथ, सर्वदीप, आकाश बाबू, धीरज आदि रहे।