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बच्चोें के सवाल का शालीनता से दें जवाब

Mon, 27 Jul 2015 01:52 AM IST
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
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कार्यशाला में तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों को मुंबई की वरिष्ठ प्रशिक्षक, निधि नागरथ ने किशोरों को सिखाने, पढ़ाने, समझाने समेत उनके चतुर्दिक विकास के अलग अलग पहलुओं पर चर्चा की। साथ ही बच्चों के सवालों का शालीनता से जवाब देने की सलाह दी।
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उन्होंने बताया कि किशोरावस्था वह समय है जब किसी बच्चे को डाटे-फटकारे बगैर चीजों को मनोवैज्ञानिक ढंग से समझा कर सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों को यह भी बताया कि कोई कितना बड़ा शिक्षक क्यों न हो जाए उसके सीखने की प्रक्रिया पूरी नहीं होती। श्रीमती नागरथ ने बताया कि कक्षा के 50 बच्चे अलग अलग तरह के हो सकते हैं। उनकी सोच, मानसिक शक्ति, पहनावा, लंबाई, रंग सब अलग अलग हो सकते हैं। यह वह समय होता है जब उनके अंदर तमाम तरह के प्रश्न उठते हैं। वे या तो अपने माता पिता से सवाल पूछते हैं अथवा अपने टीचर से। आवश्यकता इस बात की है उनके हर सवाल का शालीनता से जवाब दिया जाए। बताया कि जिस प्रकार से अनुसंधान कर विज्ञान के क्षेत्र में हम आगे बढ़ रहे हैं उसी प्रकार बच्चों को सिखाने में अनुसंधान करना चाहिए। कहा कि याद रहे किशोरावस्था से युवावस्था में पहुंचने में किशोरों को कदम कदम पर मार्गदर्शन होना चाहिए। न मिलने पर वे सही राह से भटक भी सकते हैं।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि लायंस क्लब द्वारा विश्व में चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए लायंस क्वेस्ट कार्यक्रम सभी विद्वालयों द्वारा अपनाए जाने की वकालत की। उन्होंने कार्यशाला में शामिल तीन दर्जन शिक्षकों को प्रमाण पत्र दिए। लायंस क्वेस्ट चेयरमैन रमेश काबरा ने अतिथियों का स्वागत किया। जीवीपीएस के चेयरमैन अब्दुल कादिर अंसारी ने भी संबोधित किया। प्रिंसिपल विभव  श्रीवास्तव ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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