तीन दिनों में तीन मीटर से अधिक जलस्तर बढ़ गया है। 24 घंटे में जलस्तर एक मीटर से अधिक बढ़ गया इससे छेछुआ-भुर्रा गांव के ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। शनिवार को 72.200 मीटर जलस्तर जहां रहा वहीं रविवार को यह 73.450 हो गया।
जिले में करीब 40 किमी की दूरी में फैली गंगा नदी 50 से अधिक गावों के करीब से होकर गुजरती हैं। बारिश के सीजन में जलस्तर बढने से तटीय गावों के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाती है, हालांकि सबसे अधिक नुकसान कोनिया इलाके के छेछुआ भुर्रा गांव के लोगों को उठानी पड़ती है। तीन तरफ गंगा से घिरे इन गावों में पानी का जलस्तर बढने के साथ ही कटान काफी तेजी से होता है। उत्तराखंड में हो रही मूसलाधार बारिश और मध्य प्रदेश के टौंस में आई बाढ़ का असर गंगा के जलस्तर में भी देखने को मिल रहा है। पिछले दिन दिनों के आंकड़ो पर नजर डाली जाए तो जलस्तर तीन मीटर से अधिक बढ़ गया है। सीतामढ़ी स्थति केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 23 जुलाई को जलस्तर 70.300 मीटर था जबकि 25 जुलाई को यह 72. 200 तक पहुंच गया। 26 जुलाई को सुबह 73.450 पर पहुंच गया। 24 घंटे में एक मीटर से अधिक की वृद्धि होने से छेछुआ-भुर्रा के ग्रामीणों की नींद उड़ गई है। सीतामढ़ी में खतरे के निशान का गेज नहीं है केंद्रीय जल आयोग की मानें तो 72 से 73 मीटर पर जलस्तर पहुंचते ही कटान बढ़ जाता है।