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बालवाटिका : बच्चों को भाषा में दक्ष बनाएंगी कदम और कलांकुर

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जिले के परिषदीय स्कूलों में संचालित बालवाटिका में बच्चों को भाषा, अंक और कला दक्षता बढ़ाने के लिए नई अभ्यास पुस्तिकाएं मिलेंगी। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अब कदम, कलांकुर और चहक नाम की पुस्तिकाएं जिले में भेजनी शुरू कर दी हैं।
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इसको एक जुलाई से बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी। जिले में तीन से छह साल के बच्चों के लिए 1496 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें परिषदीय विद्यालयों में 725 आंगनबाड़ी केंद्र हैं।
इनको को-लोकेटेड आंगनबाड़ी या बालवाटिका के रूप में विकसित किया गया है। इनमें करीब 50 हजार बच्चे पंजीकृत हैं। इन केंद्रों में पंजीकृत 5-6 साल के बच्चों को प्राथमिक शिक्षा से पूर्व की शिक्षा के लिए तैयार करने की पहल की गई है। बच्चों को सीखने के बेहतर और सरल विकल्प देने के लिए चहक, कदम और कलांकुर नाम की अभ्यास पुस्तिकाएं तैयार की गई हैं।
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तीन से छह साल के बच्चों के लिए इन पुस्तिकाओं के साथ-साथ 12 प्रकार की बड़ी पुस्तकें और समग्र प्रगति रिपोर्ट भी शामिल की गई हैं।
इसका उद्देश्य है कि छोटे बच्चों को खेल-खेल में और रचनात्मक तरीकों से भाषा (बोलना और समझना), गणितीय ज्ञान (अंक) और कला में निपुण बनाना है। इसकी आपूर्ति शासन स्तर से शुरू कर दी गई है।
एक जुलाई से इनको बालवाटिका में भेजी जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवम पांडेय ने बताया कि बाल वाटिका के लिए पुस्तकों की आपूर्ति हो रही है। एक जुलाई से इसको भेजा जाएगा।
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