ज्ञानपुर। नवधन गांव में ग्राम समाज की जमीन पर कब्जे के मामले में बाहुबली विधायक विजय मिश्र की साक्ष्य प्रस्तुत करने का मौका देने की अपील को मामला लंबित करने का प्रयास मानते हुए तहसीलदार कोर्ट ने खारिज कर दिया। साथ ही विधायक की उस दलील को भी खारिज कर दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि बेदखली के वादों की सुनवाई तहसीलदार के क्षेत्राधिकार में नहीं आती। कोर्ट ने 28 नवंबर को लेखपाल की रिपोर्ट पर भूमि के 0.600 हेक्टेयर रकबे से विधायक को बेदखल करने का आदेश सुनाया। विधायक पर 5.70 लाख क्षतिपूर्ति भी लगाई गई है।
ज्ञानपुर तहसील क्षेत्र के नवधन गांव में जीटी रोड पर ग्राम समाज की जमीन पर चहारदीवारी बनाकर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए भदोही विधायक रवींद्रनाथ त्रिपाठी ने शिकायत की थी। वह जमीन ऊसर खाते में दर्ज है। तहसीलदार देवेंद्र यादव ने प्रकरण में आरसी जारी करने के बाद गत 18 अगस्त को बेदखली का आदेश दिया था। इस आदेश के खिलाफ विधायक विजय मिश्र ने जिलाधिकारी कोर्ट में अपील की। इस पर जिलाधिकारी ने तहसीलदार के आदेश को निरस्त करते हुए पत्रावली को पुन: तहसीलदार न्यायालय को इस निर्देश के साथ वापस कर दी कि अपील करने वाले को भी सुनकर मामले का निस्तारण करें। सुनवाई के दौरान विधायक ने लेखपाल पर असलियत छिपाने और गलत नजरी नक्शा का प्रयोग कर झूठी रिपोर्ट लगाने का आरोप लगाया और उसकी रिपोर्ट को निरस्त करने की मांग की। कोर्ट ने 22 अक्तूबर को आपत्तिकर्ता को साक्ष्य पेश करने को कहा। तीन नवंबर को विधायक के अधिवक्ता ने राजस्व संहिता का हवाला देते हुए बेदखली के वादों की सुनवाई तहसीलदार के क्षेत्राधिकार में नहीं होने का प्रार्थना पत्र दिया। 10 नवंबर को तहसीलदार कोर्ट ने आदेश पारित किया कि राजस्व संहिता 2006 प्रभावी होने के बाद से ही पूरे प्रदेश में धारा 67(1) के अंतर्गत वादों की सुनवाई तहसीलदार करते हैं। 24 नवंबर को साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए तय तिथि पर विधायक पक्ष से कोई उपस्थित नहीं हुआ। 26 नवंबर को विधायक के वकील ने फिर प्रार्थना पत्र देकर कहा कि विधायक आगरा जेल में बंद हैं, इसलिए साक्ष्य के लिए उन्हें या तो तलब किया जाए अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान कराया जाए। तहसीलदार कोर्ट ने 22 अक्तूबर से तय समय समय के दौरान कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने को आधार मानते हुए साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए एक और आवेदन को महज प्रकरण को लंबित करने का प्रयास करार दिया। लेखपाल और विधायक के अधिवक्ता की बहस के आधार पर तहसीलदार न्यायालय ने गत 28 नवंबर को दिए आदेश में ग्रामसमाज की जमीन पर कब्जा माना और कहा कि प्रतिवादी के बयान की आवश्यकता नहीं है। राजस्व निरीक्षक को शीघ्र कब्जा हटवाने और क्षतिपूर्ति की वसूली करने का आदेश दिया।