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1.40 करोड़ से सुधरेगी नलकूप की बदहाल नालियां

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ज्ञानपुर। राजकीय नलकूप की नालियों की मरम्मत के लिए शासन ने एक करोड़ 40 लाख स्वीकृत कर दिया है। इससे करीब आठ हजार मीटर नालियों को सही किया जाएगा। इसमें 34 नलकूप की बाहरी, जबकि 12 की भूमिगत 200-200 मीटर नालियां दुरूस्त होंगी। विभाग का दावा है कि रबी सीजन से पूर्व नाली सही हो जाएगी। इससे 20 हजार से अधिक किसानों को सिंचाई में सहूलियत मिलेगी।
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रबी और खरीफ सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए नलकूप विभाग की ओर से औराई, डीघ, ज्ञानपुर, भदोही, सुरियावां, अभोली ब्लॉक में 520 नलकूपों की स्थापना कराई गई है। दो से ढाई दशक पूर्व नलकूप की नालियों की देखरेख न होने से बदहाल हो चुकी हैं। नलकूप से किसानों के खेतों की ओर रुख करने वाली नालियों में पानी को सरलता से पहुंचाने के लिए दो-तीन सौ मीटर की पक्की नालियां भी बनवाई गई हैं। स्थापना के कुछ वर्ष बाद से ही नालियां क्षतिग्रस्त होने के कारण किसान सिंचाई कार्य नहीं कर पा रहे हैं। समीक्षा और सिंचाई बंधु की बैठकों में मामला सुर्खियों में आने पर विभाग ने 520 नलकूप नालियों के नवीनीकरण की कार्य योजना चार माह पूर्व शासन को भेज दिया था। कार्य योजना को प्रादेशिक परियोजना में शामिल करने के बाद जिले के 46 नलकूपों का चयन नाली नवीनीकरण में योजना में शामिल हुआ। अधिशासी अभियंता नलकूप राजेश भारती ने बताया कि 1.40 करोड़ का बजट नाली नवीनीकरण के लिए स्वीकृत हुआ है। 34 नलकूपों का ओपेन नाली और 12 नलकूप अंडर ग्राउंड पाइप लाइन नवीनीकरण के लिए चयनित हो चुके हैं। इससे करीब आठ हजार मीटर नालियों को दुरूस्त करना है। बजट की स्वीकृति मिलने पर 10 नलकूप की ओपेन नालियों के मरम्मत का काम शुरू हो गया है।
इनसेट-
दो वर्ष से 35 करोड़ का इंतजार, स्थापित होंगे 11 नए नलकूप
ज्ञानपुर। किसानों की सिंचाई व्यवस्था में फेल हो चुके 11 नलकूपों के लिए दो वर्ष बाद भी 35 करोड़ का इंतजार विभाग को है। यांत्रिक खराबी के कारण 520 में 11 नलकूपों की जांच कराकर विभाग ने तीन वर्ष पूर्व ही निष्प्रोज्य घोषित कर दिया। किसानों की मांग पर 11 नए नलकूप को स्थापित करने की कार्य योजना और प्रत्येक नलकूप पर आने वाले लागत खर्च लगभग तीन-तीन करोड़ रुपये का स्टीमेट बनकर शासन को भेजा जा चुका है। बजट की स्वीकृति न मिलने से विभाग कोई कार्य नहीं कर पा रहा है। अधिशासी अभियंता नलकूप राजेश भारती ने कहा कि बजट मिलने का इंतजार दूर होते ही 11 नए नलकूपों की स्थापना में देर नहीं लगेगी।
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इनसेट-
कृषि क्षेत्र में बजट की स्वीकृति ऊंट के मुंह में जीरा
ज्ञानपुर। डीघ ब्लॉक के किसान निर्भय सिंह ने कहा कि शासन की प्रादेशिक परियोजना किसानों के हित में है, लेकिन कृषि क्षेत्र में बजट की स्वीकृति में उपेक्षा की जा रही है। अभोली क्षेत्र के किसान अमृतलाल ने कहा कि शासन-प्रशासन स्तर से किसानों को अनुदान की योजनाओं, खाद-बीज, सिंचाई की समस्या दूर करने के लिए प्रलोभन दिए जाते हैं। जब खेतीबारी का समय आता है व्यवस्थाएं ढाक के तीन पात वाली कहावत चरितार्थ करती नजर आती है। किसान राकेश कुमार ने कहा कि दशक पूर्व से चली आ रही समस्याओं का निराकरण करने में बजट की कमी विभागीय कामकाज को प्रभावित कर देती है। नाममात्र के बजट की स्वीकृति न देकर एकमुश्त बजट का प्राविधान तय करने से समस्याएं दूर हो सकती हैं।
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