ज्ञानपुर। औराई के मिल संचालक और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के बाद साइबर सेल ने जांच तेज कर दी है। क्षेत्र के दो मिल संचालक और एक तस्कर पुलिस के रडार में है। गिरोह के सरगना की तीनों तहसील प्रभारियों से बेहतर संबंध रहे हैं, वह इन केंद्रों पर भी धान को बेचता था। अब वह भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
अधिकारियों का पासवर्ड एवं डिजिटल सिग्नेचर चुराकर किसानों के फर्जी सत्यापन करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करने के बाद पुलिस जांच तेज हो गई है। साइबर सेल सहित अन्य एजेंसियां अब मास्टरमाइंड के चक्रव्यूह को ध्वस्त करने में जुट गई है। कब से उसका कारोबार चल रहा था और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही सबकुछ खंगाला जा रहा है। साइबर सेल के सूत्रों की माने तो एक शराब तस्कर और मिल संचालक भी सरगना के साथ मिलकर अवैध कार्य को अंजाम देता। 1100 किसानों के फर्जी सत्यापन के बाद किन-किन केंद्रों से तालमेल बनाकर धान को बेचा जाता इस बिंदु पर भी जांच की जाएगी। मामले में कुछ केंद्र प्रभारियों से भी पुलिस अभिलेख लेकर जांच कर सकती है। साइबर सेल प्रभारी अरविंद यादव ने कहा कि चारो आरोपी जेल जा चुके हैं। अब उनके करीबियों और कारोबार में संलिप्त लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञानपुर। महराजगंज के मिल संचालक और मास्टरमाइंड अनिल मिश्र की गिरफ्तारी के बाद धान खरीद को लेकर होने वाले खेल का भी खुलासा हो गया है। अधिकारियों के तालमेल से चलने वाले कारनामे में अगर तह तक जांच हुई तो नौ माह पूर्व चौरी के बरवां में हुए धान घोटाले जैसा मामला सामने आ सकता है। मार्च 2022 में बरवां केंद्र पर धान खरीद के दौरान केंद्र प्रभारी संतोष शुक्ला ने 1.23 करोड़ का घोटाला किया था। 630 टन धान भेजने के बजाए व्यापारी को बेच दिया। वहीं मिल के नाम फर्जी चालान काट दिया था। उक्त घोटाले में सचिव गिरफ्तार हो चुका है।