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पशु तस्करी का फल-फूल रहा नेटवर्क

Thu, 12 May 2016 01:39 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
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 जिले में पशु तस्करी का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। हर रोज पशुओं से लदे 15 से 20 ट्रक और अन्य वाहन जीटी रोड पर फर्राटा भरते हुए गुजर जाते हैं। यही नहीं मवेशियों को बंद लक्जरी गाड़ियों में बेरहमी से ठूंसकर सीमा पार करा दिया जाता है। बेजुबानों के कत्ल से जुड़े इस कारोबार के लिहाज से भदोही जिला पूर्वांचल का द्वार बन चला है। अंदरखाने से छनकर आई खबरों के मुताबिक हर पायदान पर पैसे की खनक से प्रभावित इस काले धंधे को सफेदपोश और खाकी दोनों की शह मिली हुई है। पुलिस विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस कारोबार में बड़ी लॉबी काम कर रही है। यही वजह है कि इस धंधे से जुड़े लोग बेखौफ होकर सड़कों पर चलते हैं। 
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पशु तस्करी का कारोबार गहराई तक जड़ें जमा चुका है। लगभग हर रोज दो-चार पशु लदे वाहन पकड़े जाने के बाद भी इस कारोबार पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। इस वर्ष अब तक पांच सौ मवेशी पकड़े जा चुके हैं। जबकि 2015 में लगभग एक हजार मवेशी पकड़े गए थे।  पुलिस विभाग के कुछ बिचौलियों की मदद से मवेशियों के वाहन को जीटी रोड से आसानी से पास करा दिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक पशु तस्करी से जुड़े लोगों ने जीटी रोड के थानों ऊंज, गोपीगंज और औराई में एक-एक सिपाहियों को मिला रखा है। इलाहाबाद या वाराणसी की सीमा से निकलते ही वे उनके संपर्क में आते हैं और थानाध्यक्ष और पशु तस्करी पर लगाम लगाने के लिए निर्धारित पुलिस टीम का लोकेशन लेकर सिग्नल दे देते हैं। जब तस्कर पूरी तरह आश्वस्त हो जाते हैं कि आगे रास्ता साफ है तो वे फर्राटा भरते हुए निकल जाते हैं। हैरत की बात यह है कि स्थानीय स्तर पर भी कुछ बिचौलिए किस्म के लोग इस कारोबार की मजबूती से झंडाबरदारी करते हैं। लिहाजा गो-हत्या से जुड़ा यह कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। बता दें कि पशु तस्करों से मिलीभगत के चलते ही पिछले दिनों ऊंज थाने के दो और गोपीगंज थाने के एक सिपाही को पुलिस कप्तान पीके मिश्र ने निलंबित कर दिया था। 
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