फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विभिन्न मस्जिदों में एतकाफ में बैठे अकीदतमंद

विज्ञापन
विज्ञापन
भदोही। रमजान के तीसरे अशरे जहन्नम से आजादी की शुरुआत के साथ ही अकीदतमंद दर्जनो लोग एतकाफ (ठहरने) के लिए सोमवार की शाम विभिन्न मस्जिदों में दाखिल हो गए। अब वे दस दिन तक मस्जिद में रहकर खुदा की इबादत में मशगूल रहेंगे। ईद का चांद देखने के बाद वे मस्जिदों से बाहर निकलेंगे।
विज्ञापन

अस्र और मगरिब के बीच विभिन्न मस्जिदों में एतकाफ के लिए लोग दाखिल हुए। मस्जिद में मौजूद अन्य लोगों ने उनका इस्तकबाल किया और अल्लाह से अपने-अपने लिए दुआ की दरख्वास्त भी की। लोगों ने मस्जिद में ही रोजा खोला और मगरिब की नमाज अदा की। इसके साथ ही वे दस दिनों की इबादत में लग गए। तकिया कल्लन शाह जामा मस्जिद के पेश इमाम हाफिज परवेज अच्छे कहते हैं कि मस्जिद में एतकाफ पर बैठने वाले अल्लाह के मेहमान होते हैं। मुकद्दस रमजान के आखिरी दस दिन वे दुनिया और परिवार, मित्रों, रिश्तेदारों को भूल कर केवल और केवल अल्लाह की इबादत करेंगे। इस दौरान उन्हें बाहर क्या हो रहा है इसकी फिक्र भी नहीं होगी।
हाफिज ने बताया कि इनका हर काम इबादत की श्रेणी में गिना जाएगा। बताया कि एतकाफ में बैठने वालों को अल्लाह अनगिनत सवाब से नवाजेगा। इनकी हर दुआएं अल्लाह तआला की बारगाह में कुबूल होगी। इस आखिरी अशरे में अल्लाह तआला अपने बंदों को जहन्नम से आजादी अता करता है।
विज्ञापन

हजार रातों से अव्वल है शबे कद्र की रातें
भदोही। रमजान के आखिरी अशरे में पांच ऐसी रातें हैं जिन्हें शबेकद्र कहा जाता है। इन रातों में की गई इबादत का अल्लाह तआला बेहतर सिला देता है। आखरी अशरे में इन पांच रातों को तलाशने का हुक्म अल्लाह तआला ने बंदों से किया है। मौलाना फैसल अशर्फी ने हदीस के हवाले से कहा कि आखरी अशरे में इन रातों को तलाश करो। यह शबेकद्र की रातें रमजान की 21, 23, 25, 27 और 29 तारीख को होती है। इन रातों में अल्लाह बंदों की दुआएं कुबूल फरमाता है। बकौल मौलाना हदीस में है कि शबेकद्र की ये रातें हजार रातों के बराबर हैं। इन्हें तलाशों और खुदा से अपनी बख्शीश की दुआएं करो।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें