घोसिया। कृषि विज्ञान केंद्र सभागार बेजवां में बुधवार को कृत्रिम गर्भाधान और पशु प्रबंधन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पं. दीनदयाल पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय मथुरा से डेढ़ माह तक चलने वाले राष्ट्रीय गोकुल मिशन अभियान शुभारंभ का सीधा प्रसारण दिखाकर किसानों को जागरूक किया गया। गोष्ठी में मुख्य अतिथि औराई विधायक प्रतिनिधि राजेंद्र दुबे ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की पशुपालकों-किसानों के लिए चलाई जा रहीं तकनीकी योजनाएं अधिक लाभकारी हैं। विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार रुके तो वर्ष 22 तक पशुपालक और किसान योजनाओं से मालामाल हो सकते हैं। पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. गोविंद कुमार चौधरी ने पशुओं के नस्लीय रखरखाव, रोग से बचाव पर प्रकाश डालते हुएकहा कि पशुपालक परंपरागत तरीकों से इतर होकर तकनीकी विधि से ईजाद हो रही विधाओं को अपनाए तो माली हालत में सुधार संभव है। उद्यान विशेषज्ञ डॉ. एके चतुर्वेदी ने औद्यानिक फसल मिशन, कृषि प्रसार विशेषज्ञ डॉ. आरपी चौधरी, डॉ. मनोज कुमार पांडेय ने पशुपालन, खेती-बारी के साथ जल संचयन और पर्यावरण से जुड़ीं जानकारियां देकर किसानों को प्रेरित किया। गोष्ठी के समापन पर वैज्ञानिकों की बात-किसानों के साथ संगोष्ठी संपन्न कराकर किसानों को जानकारी दी। इस मौके पर डॉ. पीसी सिंह, सर्वेश कुमार बरनवाल, डीपी सिंह सहित डेढ़ सौ से अधिक महिला-पुरुष किसान उपस्थित रहे।
सवा करोड़ खर्च, नहीं सुधर सकी पशुओं की सेहत
ज्ञानपुर। अस्थायी गौशाला के नाम पर जिले का पशुपालन विभाग भले ही लगभग सवा करोड़ रुपये खर्च करने का दावा कर रहा हो, लेकिन गौशालाओं में संरक्षण ले रहे पशुओं की सेहत सुधर नहीं सकी। मुंहपका, खुरपका रोग से मुक्ति भी नहीं मिल पाई। सूत्रों का मानना है कि छह ब्लाक क्षेत्रों में संचालित अब तक 15 अस्थायी गौशालाओं में कुल 1605 पशु संरक्षण ले रहे हैं और 1456 की टैगिंग और 486 का बंध्याकरण भी हो चुका है। नहर, रजवाहा और माइनरों के किनारे संचालित गौशालाओं की हालत नारकीय है। गंदगी और जलजमाव से पशु तरह-तरह के रोगों से ग्रसित भी हैं लेकिन कृषि गोष्ठियों, प्रशिक्षण शिविरों और कृषक मेलों में इनके हालात पर एक बार भी चर्चाएं न होना शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।