औराई ब्लॉक में कमीशनखोरी के चलते कई पात्र आवास योजना से वंचित हैं।
आवास योजना में चयनित होने और सत्यापन के बाद भी कई लोगों को आवास का लाभ नहीं मिल रहा। कंसापुर गांव निवासी एक लाभार्थी महिला को डेढ़ साल पहले आवास बनाने के लिए पहली किस्त मिली। इसके बाद वह दूसरे किस्त का इंतजार कर रही थी।
इसी बीच उनका निधन हो गया। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य हर गरीबों को छत मुहैया कराना है। शासन की ओर से आवासों के नाम पर लाखों रुपये जारी किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ कमीशखोरी के चलते कई पात्र योजना से वंचित हैं। औराई ब्लॉक के कई गांवों में कमीशनखोरी के चलते पात्रों को आवास से वंचित कर दिया जा रहा है।
औराई ब्लॉक के कंसापुर गांव में 16 दिव्यांगों ने आवास के लिए आवेदन किया था। योजना के तहत आठ दिव्यांगों का सत्यापन के बाद आवास के लिए चयन हुआ, लेकिन कमीशन खोरी के कारण केवल एक को ही आवास का लाभ मिल सका।
दिव्यांग संजय, दीपक, रेखा, सुनीता, नागेंद्र, पुदयी पात्र होने के बावजूद आवास योजना से वंचित हैं।
इसी तरह गांव की वनवासी बस्ती में 52 वनवासियों को पक्की छत मुहैया कराने के लिए कई अधिकारियों ने बस्ती में दौरा किया। यहां 18 लोगाें को आवास जारी किए गए, लेकिन आखिरी में केवल पांच को आवास का लाभ मिला।
गांव निवासी भगवानी को एक साल पहले आवास की पहली किस्त मिली। उसके बाद दूसरे किस्त के लिए वे ब्लॉक के चक्कर लगाती रहीं। इसी बीच बीते 11 अप्रैल को उनका निधन हो गया। यहीं हाल हुसैनीपुर और चकापुर गांव का भी है।
इन गांवों में भी 40 और 105 लोगों का सत्यापन किया गया है, लेकिन अब तक एक भी पात्र को आवास नहीं मिला। कंसापुर प्रधान शिवशंकर जायसवाल ने बताया कि गांव में सत्यापन और आवास स्वीकृति के बाद भी ब्लॉक के ऑपरेटर और जिम्मेदारों की मिलीभगत से पात्रों को आवास से वंचित कर दिया जाता है।
आवास योजना से वंचित लोग जर्जर पुश्तैनी आवास, प्लास्टिक और टिन छप्पर में रहने को विवश हैं। लोगों का आरोप है कि आवास योजना में कमीशननखोरी के कारण पात्रों को आवास से वंचित किया जाता है। प्रधान शिवशंकर जायसवाल ने बताया कि गांव की वनवासी बस्ती के 21 लोगों को 2021-22 में साई तकिया के पास जमीन पट्टा हुआ था, लेकिन आज तक न तो जमीन आवंटित हुआ और न जमीन के कागज मिल सके। आवास तो दूर की बात है।