प्रशासन की ओर से सड़क के किनारे पानी निकासी की नालियों पर बनाए गए बारजे को भी तोड़कर दुरुस्त किया गया। इससे लगभग डेढ़ सौ मीटर तक जमीन को अतिक्रमण से खाली कराया गया। अतिक्रमण हटवाने पहुंचे प्रशासन को देखकर भारी भीड़ जुट गई। कुछ लोगों ने विरोध भी किया। इससे सुरक्षा कर्मियों को लाठियां भांजकर उन्हें हटाना पड़ रहा था। इससे नगर में मंगलवार को घंटों तक गहमागहमी का माहौल भी बना रहा। इसको लेकर कई बार विवाद भी बढ़ती नजर आई।
भेदभाव का आरोप भी लगा
सुरियावां। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटवाने पर नगर के कई नेताओं और पीडि़तों ने भेदभाव बरतने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि प्रशासन की ओर से जान बूझकर कमजोर लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। जबकि रसूखदारों के अतिक्रमण पर हाथ नहीं डाल रही है। यदि प्रशासन को अतिक्रमण मुक्त कराना है तो एक साथ कराए। इसको लेकर थाने पर पंचायत भी हुई, तब जाकर किसी तरह मामला शांत हुआ। विरोध जताने वालों में जतन गुप्ता, अवधेश कुमार, रमेश गुप्ता, सुरेश नेता, पप्पू कौशल आदि शामिल रहे।