निजी अस्पताल संचालकों की सांसत बढ़ने वाली है। जिले में 60 नर्सिंग होम सहित 138 पंजीकृत अस्पतालों की जांच करने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने शनिवार को तीन सदस्यीय टीम गठित की।
टीम सुविधा, संसाधन सहित अस्पताल की व्यवस्थाओं की बारीकी से सत्यापन कर रिपोर्ट तैयारी करेंगी। खामियां मिलने पर अस्पताल संचालक से जवाब भी मांगा जाएगा। जांच रिपोर्ट सीएमओ को भेजा जाएगा।
अखबार के मंगलवार के अंक में एक एंबुलेंस पर सात अस्पतालों की जिम्मेदारी, फोन करने के बाद पहुंचने में लगते हैं 40 मिनट... नामक शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई। कार्यालय में रखे निजी अस्पतालों की फाइलों की पन्ना स्वास्थ्यकर्मी पलटने लगे। सीएमओ डॉ. एसके चक ने खबर का संज्ञान लेते हुए मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। इसमें एंबुलेंस नोडल अधिकारी, डिप्टी सीएमओ सहित एक स्वास्थ्यकर्मी शामिल है।
टीम अस्पतालों में पहुंच कर वहां की व्यवस्था देखेगी। जैसे कौन से डाॅक्टर बैठते हैं, सर्जन कौन हैं, यहां उपकरण क्या है, ऑपरेशन होते हैं कि नहीं, कौन सी एंबुलेंस अटैच है, मरीजों को समय से एंबुलेंस मिलती है या नहीं, अस्पताल के पास पार्किंग व्यवस्था है कि नहीं, रोजाना ओपीडी कितनी है, डॉक्टरों का निवास कहां पर है, आदि सहित कुल 22 बिंदुओं की जांच करेंगी। रिपोर्ट सीएमओ को सौपेंगी। खामियां मिलने पर अस्पाल संचालक से स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई भी की जाएगी। संवाद