गोपीगंज कोतवाली के गोसाईपुर में जमीन विवाद को लेकर तीन दिन पहले हुई मारपीट में घायल युवक की मंगलवार की सुबह बीएचयू ट्रामा सेटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। करीब साढ़े चार बजे युवक का शव गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने जमकर हंगामा किया। एबुलेंस पर पड़े शव को ग्रामीण व परिजनों ने तीन घंटे तक उतरने नहीं दिया।
मामले में परिजन पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते रहे। ग्रामीणों को आक्रोश को देखते हुए छह थानों की पुलिस मौके पर डटी रही। उच्चाधिकारी ग्रामीणों को समझाने में जुटे रहे। गोपीगंज कोतवाली के बिहरोजपुर गोसाईपुर गांव में बीते शनिवार को रास्ते के विवाद को लेकर दो पक्षों में मारपीट हो गई।
जिसमें एक पक्ष से प्रमोद कुमार यादव (38) और दूसरे पक्ष से गुलाब यादव (38), रंजय यादव (27) व आरती यादव (9) घायल हो गए थे। घायलों का इलाज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया गया। गंभीर रूप से घायल रंजय यादव को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया था। जहां से उन्हें बीएचयू ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया था।
पुलिस की ओर से दोनों पक्षों की ओर से मुकदमा दर्ज किया गया। मंगलवार की सुबह रंजय यादव की ट्रामा सेंटर में मौत हो गई। जिसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया। शाम साढ़े चार बजे के आसपास एबुलेंस के माध्यम से मृतक का शव गांव पहुंचा। युवक का शव गांव पहुंचते ही मौके पर करीब 500 से अधिक लोग जुट गए। जिसमें 300 से अधिक महिलाएं थे।
लोगों ने मृतक का शव लेने से इनकार करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। वहीं परिजनों को मुआवजे के साथ जमीन संबंधी मामले के निष्पक्ष निपटारे की मांग कर रहे है। लोगों की भीड़ को देखते हुए मौके पर औराई, कोईरौना, ऊंज, गोपीगंज, ज्ञानपुर, महिला थाना की पुलिस बुला ली गई।
एडिशनल एसपी डॉ. तेजबीर, सीओ चमन सिंह चावड़ा और एडीएम अरूण गिरी मौके लोगों को समझाने में जुटे रहे, लेकिन तीन घंटों तक लोग किसी भी हाल में समझने को तैयार नहीं थे।
आरोपियों के घर की महिलाओं को लाए थाने
युवक के मरने की सूचना के बाद पुलिस के हाथ पांव फूलने लगे। गांव में लोगों का आक्रोश बढ़ने लगा। शव आने के पहले ही पुलिस की टीम भारी संख्या में गांव पहुंचकर आरोपियों के घर की महिलाओं को साथ हिरासत में लेकर थाना ले आई। मृतक तीन भाई तीन बहनों में छोटा था। मृतक को दो जुड़वां पुत्रियां व एक पुत्र है। मृतक एक निजी कालीन कम्पनी में कार्य करता था। पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
......तो बच जाती मेरे भाई की जान
मृतक के चचेरे भाई गणेश यादव ने आरोप लगाया कि शिकायत के बावजूद पुलिस की मिलीभगत से जबरन निर्माण कराया जा रहा था। अगर समय से पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई होती तो उनके भाई की जान बच जाती। बताया कि जब भी शिकायत की जाती थी तो दरोगा जी द्वारा गालियां दी जाती थी। जिसका उसके पास काॅल रिकार्ड भी है।
एसपी भदोही अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि मामले में पहले समझौता हुआ था। इसके बाद भी आरोपी पक्ष की ओर से निर्माण की जा रही थी। जिसको लेकर एक जनवरी को मारपीट हुई थी। जिसमें यह घायल हुआ था। इस मामले में आरोपियों को दो दिन जेल भेजा गया था। हालांकि कल ही उन्होंने जमानत करा ली थी। आरोपी पक्ष की महिलाओं को हिरासत में लिया गया है। जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। पुलिस लोगों को समझाने में जुटी है।