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केवाईसी को लेकर बढ़ रहा उपभोक्ताओं में असंतोष

Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
Bhadohi
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भदोही। केवाईसी भरने को लेकर उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस भ्रम को खत्म करने मे एजेंसियों के साथ साथ इंडेन के क्षेत्रीय अधिकारी भी नाकाम रहे हैं। केवाईसी भरने के लिए हर रोज एजेंसियों के बाहर सैकड़ों की संख्या में लोग जमा हो रहे हैं लेकिन मुश्किल से दो दर्जन लोगों का काम हो पा रहा है तथा बाकी को बैरंग लौटा दिया जा रहा है। इससे लोगों में असंतोश बढ़ता जा रहा है।
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4 नवंबर को तीनों प्रमुख तेल कंपनियों के राज्य समन्वयक बीएस कैंथ का बयान प्रकाशित हुआ कि इंडेन के ट्रांसपेरेंसी पोर्टल पर मल्टीपलकनेक्शन धारक उपभोक्ताओं की सूची डाल दी गई है। जिन उपभोक्ताओं के नाम उस सूची में है केवल उन्हें ही केवाईसी जमा करना है। उन्होंने तो यह भी बताया कि वह सूची सभी एजेंसियों को भी भेज दी गई है ताकि एजेंसियां अकारण ही लोगों को परेशान न करें। इसके बाद लोगों ने इंडेन के ट्रांसपेरेंसी पोर्टल पर जारी सूची में अपना नाम ढूंढना शुरू कर दिया। पोर्टल पर भदोही गैस सर्विस के कुल 11300 मे से 5949, मां ईशानी गैस सर्विस के कुल 9912 में से 4351 तथा मनीषा गैस सर्विस के कुल 8404 उपभोक्ताओं में से 842 लोगों मल्टीपल कनेक्शन सूची में नाम जारी किए गए हैं जिन्हें केवाईसी अनिवार्य रूप से भरना होगा।
बात एजेंसियों की करे तो उन्हें न तो किसी सूची की जानकारी है ना ही कंपनी से ऐसा कोई निर्देश आया है। इस संबंध में जब इंडेन के भदोही जनपद के फील्ड आफिसर स्वर्ण सिंह से जानकारी ली गई तो उन्होंने भी एजेंसी संचालकों वाली कहानी दोहराई। उन्होंने कहा कि सभी को केवाईसी जमा करना है। जब उनका ध्यान वेबसाइट पर प्रदर्शित की जा रही सूचना के बारे में बताया गया तो उन्होंने साफ कहा कि चाहे जो हो मैं इतना जानता हूं कि प्रत्येक उपभोक्ता का केवाईसी जमा होना है।
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दिन भर लाइन में लगने के बाद भी बैरंग लौट रहे उपभोक्ता
भदोही। केवाईसी फार्म जमा करने के लिए एजेंसियों पर रोजाना सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो रही है। फार्म जमा करने में भारी दिक्कत हो रही है। भारी संख्या मे लोगों के बैंकों में खाते नहीं हैं जो खाते खुलवा रहे हैं लेकिन अनगिनत उपभोक्ता जिनके खाते हैं भी तो उन्हें दौड़ाया जा रहा है। नगर के तहसील स्थित एजेंसी से कई उपभोक्ताओं को यह कहकर लौटा दिया गया कि उनके खाते का संचालन तीन माह से नहीं हुआ है। ऐसे में उपभोक्ताओं को बैंकों में कुछ रकम जमा करने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
सबसे बड़ी परेशानी तो फार्म जमा करने मे हो रही है। एजेंसी पर उपभोक्ताओं से लाइन लगवा कर एक एक उपभोक्ता के सभी कागजात स्कैन कर डाले जा रहे हैं। इसमें एक फार्म जमा करने में 25-30 मिनट लग रहे हैं और शाम तक केवल 25-30 लोगों के फार्म ही स्वीकार हो पाने से भारी संख्या में उपभोक्ताओं को बैरंग लौटना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यह तो एक प्रकार से शोषण हो रहा है।
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