जिले की 98 ग्राम पंचायतों में सदस्यों के दो तिहाई पदों पर निर्वाचन न
होने के चलते ग्राम पंचायत के गठन पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पंचायत
का गठन न होने से नए प्रधान शपथ तो लेंगे, लेकिन ग्राम पंचायत का सारा
कामकाज प्रशासक के हवाले रहेगा। पंचायत के गठन होने तक नए प्रधान अधिकार
विहीन ही रहेंगे।
पंचवर्षीय योजना के तहत प्रत्येक पांच सालों में
चुनावों के बाद गांवों में नई सरकार गठन होता है। रविवार को मतगणना के बाद
जिले के 561 गांवों में नए ग्राम प्रधान चुन लिए गए। पंचायत के गठन में
ग्राम पंचायत सदस्यों की भूमिका अहम होती है।
जिन ग्रामसभाओं में दो तिहाई
ग्राम पंचायत सदस्य नहीं होते, वह पंचायत अधूरी मानी जाती है। जिले के 561
ग्रामसभाओं में करीब 98 ग्रामसभाएं ऐसी हैं, जहां पर दो तिहाई ग्राम पंचायत
सदस्य के पद रिक्त हैं, जिससे इनके गठन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
औराई ब्लॉक में भवानीपुर पश्चिम, जेठूपुर, बासदेवपुर, मुक्तापुर, बनौली,
कुनबीपुर, मेदनीपुर समेत करीब 15 ग्रामसभा ऐसी हैं, जिसमें सदस्यों के पद
दो तिहाई से अधिक रिक्त हैं। इसी तरह डीघ में 18, ज्ञानपुर में 17,
सुरियावां में 14, भदोही में 22, अभोली में 10 ग्रामसभाएं हैं।
विभागीय
आंकड़ों पर गौर किया जाए तो ग्राम पंचायत सदस्य के 7047 पदों में से 3500
पर चुनाव हुए, जबकि 1700 से अधिक पद निर्विरोध हो गए। एक हजार से अधिक पदों
पर किसी प्रत्याशी ने चुनाव नहीं लड़ा।
इससे वह खाली रह गईं। जिला पंचायत
राज अधिकारी राम आसरे दूबे ने बताया कि जिन ग्रामसभाओं में दो तिहाई सदस्य
नहीं हैं, वहां पर पंचायतें गठित नहीं हो सकेंगी। नए ग्राम प्रधान शपथ
ग्रहण तो करेंगे, लेकिन गांव से जुड़े कार्य नहीं कर सकेंगे।