98 सदस्यों का परिवार एक छत के नीचे
भौतिक सुविधाओं के चक्कर में एकाकी होकर अपनेपन के सुख से दूर हो रही नई पीढ़ी के लिए श्याम नारायण मिश्र का परिवार एक मिसाल है। पारिवारिक एकजुटता के जिस संस्कार का उन्होंने वर्षों पहले बीजारोपण किया था, वह आज एक वटवृक्ष बन चुका है। उनकी सीख आज भी सजग सारथी की तरह परिवार का मार्गदर्शन कर रही है। यही वजह है कि मौजूदा दौर में श्याम नारायण तो नहीं रहे, लेकिन उनके आगे की तीन पीढ़ियाें के 94 सदस्यों का परिवार एक छत के नीचे खुशी-खुशी रह रहा है। सहसा यकीन नहीं होता, लेकिन यह सच है कि स्व. श्याम नारायण मिश्र के पांच पुत्रों का यह परिवार जिले में संयुक्त परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
जिला मुख्यालय से लगे कांवल गांव के मिश्र परिवार में आपसी सामंजस्य से पारिवारिक एकता की अनूठी इबारत लिखी जा रही है। मानो इस घर में हर रोज एक बारात आई हो। श्याम नारायण मिश्र के पांच पुत्रों लक्ष्मी नारायण मिश्र, श्री नारायण मिश्र, हृदय नारायण मिश्र (सजावल), अभय नारायण मिश्र और अवध नारायण मिश्र में से बड़े पुत्र लक्ष्मी नारायण अब नहीं रहे, लेकिन उनसे जुड़ी आगे की पीढ़ियां अब भी संयुक्त परिवार का हिस्सा हैं। चाचा, चाची और चचेरे भाई-बहनों का आपसी लगाव कुछ ऐसा है कि उनके पुत्रों को कभी दूरी का आभास ही नहीं हुआ। 35 वर्ष से गांव के प्रधान रहे दूसरे नंबर के श्रीनारायण वर्तमान में घर में सबसे बड़े हैं, लेकिन घर का मालिकाना उन्होंने अपने से छोटे भाई हृदय नारायण यानी सजावल मिश्र को दे रखा है। लिहाजा बच्चों के कपड़े से लेकर फीस और घर के खर्च की पूरी जिम्मेदारी सजावल मिश्र की है। दूसरी पीढ़ी में लक्ष्मी नारायण मिश्र के एक पुत्र सुरेंद्र मिश्र, श्री नारायण के दो पुत्र सुरेश और अशोक, सजावल के तीन पुत्र दिनेश, रमेश और महेश, अभय नारायण के दो पुत्र राकेश और देवव्रत और अवध नारायण के तीन पुत्र संतोष, आशुतोष, अजीत को मिलाकर दूसरी पीढ़ी में 12 लड़के और 15 लड़कियां हैं।
इसके बाद तीसरी पीढ़ी में 26 लड़के और उनकी 25 बहनें हैं। यह पीढ़ी भी बड़ी हो चली है। जल्द ही चौथी पीढ़ी की भी शुरुआत हो सकती है। कुल मिलाकर मिश्र परिवार में इस समय चार बुजुर्ग, 34 पुरुष, 40 लड़कियां और 16 महिलाएं हैं।