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महंगाई का तड़का, बस्ते का बोझ ‘भड़का’

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ज्ञानपुर। नया शिक्षा सत्र शुरू होने से पहले अभिभावकों की जेब पर महंगाई का तड़का लग गया है। इससे बस्ते का बोझ भी बढ़ गया है। किताबों के लिए विद्यार्थी और अभिभावक बुक सेंटर पर चक्कर काट रहे हैं। अभिभावकों की मानें तो करीब 15 से 20 फीसदी महंगाई शिक्षा पर बढ़ी है, वहीं बच्चों की ड्रेस पर भी महंगाई की मार पड़ी है।
जिले में लगभग दो हजार विद्यालय संचालित होते हैं। इनमें से 1143 परिषदीय, 800 मान्यता प्राप्त स्कूल संचालित होते हैं। वर्तमान शिक्षा सत्र में किताबों के मूल्य में 10 से 15 फीसदी का इजाफा हो गया है। वहीं पाठ्य पुस्तकों में 10 से 20 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है। ड्रेस पर सात से आठ फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं स्कूल बैग और पेंसिल बॉक्स, टिफिन बॉक्स आदि पर भी 15 से 20 फीसदी का इजाफा हुआ है। इधर, शासनादेश के अनुरूप जिस विभाग से विद्यालय को शिक्षण कार्य की अनुमति है, उसी के अनुसार ही पाठ्यक्रम विद्यालयों में पढ़ाया जाए, पर जिले में मान्यता बेसिक शिक्षा परिषद से लेकर विद्यालय मनमाना पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं। वह विद्यालय से ही पाठ्यक्रम दे रहे हैं, जिसका काफी अधिक मूल्य वसूल रहे हैं। परिषदीय स्कूलों में चलनेे वाली सरकारी किताबों का भी बाजार में टोटा है। दुकानदारों केे पास निजी प्रकाशकों की किताबें हैं, जो सामूहिक रूप से स्कूलों को मुहैया कराई जा रही है। इससे अभिभावक और छात्र दोनों परेशान है। उधर, निजी विद्यालय अपना ही पाठ्यक्रम चलाते हैं, जिस पर उनको 50 से 60 फीसदी प्रति सेट पर कमीशन मिलता है। वहीं विद्यालय स्कूल ड्रेस, बैच ,टाई, बेल्ट और स्कूल वाहन का भी पैसा लेते हैं, जिसमें भारी बचत होती है। इतना ही नहीं शिक्षा सत्र के दौरान हर स्कूल से लाखों की किताब कापियों की बिक्री की जाती है। संचालक गिने-चुने प्रकाशकों के बहाने अभिभावकों के जेब पर तगड़ी चोट दे रहे हैं।
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इनसेट
ऐसे तैयार होता निजी स्कूलों का बस्ता
एलकेजी-1700 से 1950 रुपये,
केजी-1850 से 2050,
कक्षा एक-2,100 से 2,300,
कक्षा दो-2,250 से 2,500,
कक्षा तीन-2,600 से 2,750,
कक्षा चार-2,850 से 3,100,
कक्षा पांच-3,150 से 3,350,
कक्षा छह-3,400 से 3,600,
कक्षा सात-3,750 से 3,900,
कक्षा आठ-4,150 से 4,500 रुपये तक।
इनसेट
फिर बिना किताब शुरू होगी पढ़ाई
ज्ञानपुर। करीब तीन साल से परिषदीय स्कूलों में बेपटरी हुई नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण अब भी सुधर नहीं सका। कान्वेंट की तर्ज पर एक अप्रैल से शिक्षा सत्र तो शुरू कर दिया गया, लेकिन किताबों की आमद नहीं हो सकी है। जिससे बच्चों को पुरानी या बिना किताब के ही पढ़ाई करनी होगी।
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