ज्ञानपुर। सरकारें भले बदल गई पर राजस्व विभाग की कारगुजारी में बदलाव नहीं हो सका। इससे तालाबों पर कब्जे नहीं रुक रहे हैं। औराई, भदोही और ज्ञानपुर तहसील में करीब 500 से तालाब कब्जे के चलते अपनी सुंदरता को खो चुके हैं। एंटी भू माफिया टास्कफोर्स सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रही है तो क्षेत्रीय लेखपाल तालमेल कर कब्जे की नींव रखवा रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट और सरकार तालाबों को कब्जा मुक्त करा रही है। सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद एंटी भू माफिया टीम का गठन भी किया गया। शुरूआती कुछ दिनों तक टीम सक्रिय रही, लेकिन उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। शिकायतों के बाद भी राजस्व विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तालाबों से अतिक्रमण हटाने को लेकर संजीदा नहीं है। ज्ञानपुर के गोसाईं बाजार, बैरीपरवां, सरपतहां, लखनों, ठकुराईन क तारा, डीघ के दरवांसी, नारेपार सहित सभी गावों में तालाबों पर कब्जा है। अधिकारी तालाबों से कब्जा हटाने को लेकर कितना संजीदा है इसका उदाहरण ज्ञानपुर के सरई मिश्रानी गांव में देखने को मिलेगी। यहां 26 बिस्वे का तालाब एक बिस्वा में सिमट चुका है। गांव निवासी राकेश कुमार ने 26 मार्च को आईजीआरएस पोर्ट पर शिकायत दर्ज की। उसमें 31 मार्च तक निस्तारण के लिए कहा गया है जबकि अब भी बिना रोकटोक तालाब में ट्रैक्टर से मिट्टी गिराकर पाटा जा रहा है। आरोप लगाया कि लेखपाल की कृपा से तालाब पर अतिक्रमण किया जा रहा है। प्रशासनिक आंकड़ो पर भले ही कुछ तालाबों पर कब्जा है लेकिन हकीकत इससे जुदा है। एडीएम राम सिंह वर्मा ने कहा कि शिकायतों पर कार्रवाई की जाती है। सरई मिश्रानी गांव के मामले को दिखवाएंगे।
पहले भी विवादों में आया था लेखपाल
ज्ञानपुर। सरई मिश्रानी गांव का लेखपाल पहले भी विवादों में आ चुका है, हालांकि अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किसानों से पैसा मांगने का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली तो मची लेकिन बाद में मामला ठंडा बस्ते में चला गया।