ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी डिजिटल इंडिया की मुहिम जिले में कागजों में ही दम तोड़ दिया। करीब तीन साल गुजरने के बाद भी 561 ग्राम पंचायतों में एक भी डिजिटल नहीं हो सकी। ई-ग्राम पंचायत बनाने की मुहिम को पंख नहीं लग सके। काम के नाम पर 54 ग्राम पंचायतों को वाईफाई से जोड़ा गया पर संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका।
डिजिटल इंडिया के तहत सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए 2016 में ग्राम पंचायतों में बने पंचायत घरों को कंप्यूटर और इंटरनेट से जोड़ने की कवायद शुरू की गई। इसके तहत ग्राम पंचायतों में आप्टिकल फाइबर केबल भी बिछाई गई, लेकिन तीन साल गुुजरने के बाद भी ई-पंचायत की मुहिम को पंख नहीं लग सके। स्थिति यह है कि योजना कागजों में ही दम तोड़ती नजर आ रही है। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के 561 ग्राम पंचायतों में डीघ के करीब 54 गांवों को आप्टिकल फाइबर केबल से जोड़ा गया और वाईफाई की व्यवस्था भी की गई लेकिन संचालन अब तक नहीं हो सका। पंचायत घरों में न तो कंप्यूटर की उपलब्धता है और न अन्य सुविधाएं। जिससे ग्राम प्रधान और ग्राम पंचायत अधिकारी ब्लॉकों से ही सारा लेखाजोखा अपलोड करते हैं। योजना के लिए अलग से कोई बजट तय नहीं किया गया था। राज्य वित्त और 14वें वित्त से ही खर्च करना था लेकिन जब गावों में केबल आदि बिछाने का कार्य ही पूर्ण नहीं हो सका तो अन्य कार्य अधूरे ही रह गए हालांकि कुछ गावों के युवाओं और प्रधानों ने अपनी मेहनत से गांव को वाईफाई से जरूर जोड़ने का प्रयास किया है। गांव के स्कूलों पर वाईफाई व्यवस्था को प्रभावी कर दिया है। ज्ञानपुर के सीखापुर में युवाओं तो जोरई गांव में प्रधान की मेहनत से वाईफाई व्यवस्था शुरू हो गई है, हालांकि यह सुविधा सिर्फ स्कूल तक ही सीमित है।
निजी स्कूल की शोभा बढ़ा रहा सिस्टम
ज्ञानपुर। डीघ विकास खंड के दरवांसी गांव में आया वाईफाई सिस्टम एक निजी स्कूल की शोभा बढ़ा रहा है। वाईफाई को परिषदीय स्कूल में लगाने के बजाए निजी विद्यालय में लगाया गया है। जिसको लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।
डिजिटल इंडिया के लिए अलग से कोई बजट नहीं था। बीएसएनएल और एक फर्म की ओर से गांवों में आप्टिकल केबिल बिछाया जा रहा था। करीब तीन माह से यह काम भी बंद है। ई- पंचायते होने से गांव में काफी सुविधाएं बढ़ सकेंगी।