ज्ञानपुर। गांवों को कृत्रिम प्रकाश से रोशन करने की मुहिम जिले में फेल हो चुकी है। ं मानक और आदेश को नजर अंदाज करने से ऐसा हो रहा है। नेडा के बजाए सामान्य फर्मों से ही सोलर लाइट लगा दी गई। ऐसे में तीन माह में ही सोलर की लाइट बुझ गई। भदोही ब्लॉक में तो चहेती फर्म पर मेहरबानी ने विभागीय अफसरों की नींद उड़ा दी है।
ग्रामीण अंचलों में बिजली कटौती की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए वित्तीय वर्ष 2016-17 में सोलर लाइट लगाने की कवायद शुरू हुई। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले के छह ब्लॉकों के 561 गांवों में ग्राम पंचायत निधि से करीब साढ़े चार हजार सोलर लाइट लगाई गई। कुछ पंचायतों में तीन से चार सोलर लाइटें लगीं तो कुछ ब्लॉकों में मनमानी ढंग से सोलर लाइट स्थापित की गई। प्रधान, सेक्रेटरी, ब्लॉक कर्मी से लेकर ब्लॉक प्रमुख तक ने सोलर लाइट लगवाने में मानकों को नहीं परखा। जो सोलर लाइट बाजार में 13 से 15 हजार में मिल रही है, उसे लगाने के लिए 21 से 22 हजार का चेक दिया गया। धांधली को लेकर एक साल पहले ही शासन ने मनमानी फर्मों से सोलर लाइट लगाने पर रोक लगा दी। सिर्फ नेडा से ही कई शर्तों पर लाइट लगाने की अनुमति दी गई लेकिन भदोही ब्लॉक में एक चेहती फर्म को लाभ देने के लिए ब्लॉक के एक कर्मी ने मानक को दरकिनार कर दिया। सबसे खास बात है कि मार्च से पहले उक्त फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए चेक भी काटने की कवायद तेज कर दी गई है। दबी जुबान से प्रधान भी इसे स्वीकार कर रहे हैं लेकिन वे खुलकर सामने आने से कतरा रहे हैं। डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी ने कहा कि सोलर लाइट लगाने के लिए सिर्फ नेडा अधिकृत है। उसमें भी कई शर्तें शामिल है। अगर दूसरी फर्म सोलर लाइट लगा रही हैं तो कार्रवाई की जाएगी।