भदोही। एक ओर सरकार जहां विश्व की सबसे वृहद स्वास्थ्य गारंटी योजना आयुष्मान भारत की शुरुआत कर रही है, वहीं, स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली के कारण आमजन को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य केंद्रों पर लाखों रुपये हर महीने खर्च के बाद भी यदि अंदर घुसते ही बड़ी-बड़ी घास और झालियां नजर आएं तो वहां कौन मरीज जाएगा। कुछ ऐसी ही हालत है जयरामपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदोही से संबद्ध जयरामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कुछ इस हाल में है। कहने को तो यहां चिकित्सक और स्टाफ सब हैं लेकिन बाहर से देख कर कोई यही कहेगा कि यहां कौन अपना इलाज कराने आएगा। औराई रोड स्थित जयरामपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना रामपुर, सर्रोई, दुलमदासपुर, बभनौटी, प्रजापतिपुर, बनकट आदि के ग्रामीणों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया था। स्वास्थ्य केंद्र के मुख्य भवन के साथ साथ परिसर में ही स्टाफ का आवास भी बनाया गया था, जो जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। लोग बताते हैं कि पहले लोग यहां रहते भी थे, लेकिन अब यहां के आवासों में कोई रहना नहीं चाहता। स्वास्थ्य केंद्र देखने मात्र से पता लग जाता है कि यहां की साफ सफाई हुए महीनों गुजर गए होंगे। प्रांगण में बड़ी बड़ी घास इस बात की गवाही देती है कि अब तक स्वच्छता अभियान की रोशनी यहां तक नहीं पहुंची है। केंद्र के अंदर की जमीन झाड़ियों के चलते नजर नहीं आती।
गत दिनों ब्लॉक प्रमुख प्रशांत सिंह चिट्टू ने केंद्र का दौरा कर केंद्र के संचालन के बाबत जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों से केंद्र का में समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए पत्र भी लिखा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक, डॉ. वीके सिंह ने बताया कि सामान्य तौर पर 50 मरीजों की ओपीडी प्रतिदिन होती है। मरीजों के लिए दवाएं भी उपलब्ध हैं, लेकिन जर्जर आवासों के चलते वहां कोई रहता नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य केंद्र में नियमित सफाई न होने का संज्ञान लिया जा रहा है। शीघ्र ही वहां साफ सफाई व्यवस्था सुचारु की जाएगी।