ज्ञानपुर (भदोही)। हिंदी साहित्य परिषद की ओर से भिदिउरा स्थित चित्रकूट अखंड आश्रम में रविवार को तुलसीदास की जयंती धूमधाम से मनाई गई। साहित्यकारों ने सनातन धर्म के लिए उनके कार्यों को याद किया। कहा कि सनातन धर्म को फर्श से अर्श पर लाने वाले संत तुलसीदास थे। कार्यक्रम का आगाज संत शिरोमणि तुलसीदास की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर किया गया।
मुख्य अतिथि प्रख्यात दार्शनिक और पूर्व कुलपति डॉ. बी पांडेय ने कहा कि तुलसी का आविर्भाव समय की मांग थी। तत्कालीन परिवेश छिन्न-भिन्न था, सनातन धर्म रसातल की ओर चला गया था। ऐसे समय में तुलसी ने जो समन्वय किया वह एक क्रांतिकारी कदम था। वह जोड़ने वाले संत थे न कि तोड़ने वाले। पं. उमाशंकर ने कहा कि तुलसी परिपक्व अवस्था में सारी साधनाओं को समेटकर रामचरित मानस का गायन किया। डॉ. राजकुमार पाठक ने कहा कि तुलसी दुनिया के सबसे बड़े विचारक थे। सुरेश पांडेय मंजुल ने कहा कि तुलसीदास का ऋण सनातन धर्मावलंबी कभी भी उतार नहीं पाएंगे। अंत में परंपरा के अनुसार तुलसी साहित्य सेवा सम्मान मानस मर्मज्ञ रामकथा वाचक पं. कमलाशंकर तिवारी को दिया गया। उन्हें अंगवस्त्रम और प्रशस्ति पत्र देकर भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर दीनानाथ पाठक, पारसनाथ मिश्र, राधेश्याम तिवारी, कन्हैयालाल दूबे, विद्यापति शुक्ल, संजय पाठक, केशव प्रसाद मिश्र, संदीप कुमार बालाजी, हंसराज तिवारी, बालेंद्रु भूषण पाठक समेत कई लोग मौजूद रहे।