ज्ञानपुर। जुलाई माह के प्रथम सप्ताह में कृषक कार्यों से जुड़े विभागों ने एनआईसी कक्ष में बैठ कर शासन को शतप्रतिशत रिपोर्ट देकर अपना पीठ थपथपा रहे हैं लेकिन किसानों से जुड़ी मूलभूत समस्याएं विभाग के लिए आइना ही दिखाने का काम कर रही हैं।
मामला नहर विभाग से जुड़ा हो या फिर नलकूप विभाग की ओर से सिंचाई व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए बनवाई जा चुकी नालियां जर्जर होकर विभागीय पोल को खोलने में किसी से पीछे भी नहीं हैं। ज्ञानपुर, औराई और भदोही तहसील से जुड़े किसानों की सिंचाई सुविधा के लिए दर्जनों नलकूप के साथ-साथ मुख्य नहर, एक दर्जन से अधिक रजवाहा-माइनर से हजारों बीघे खेतों की सिंचाई की सुविधा देकर करोड़ों रुपये की लागत से नालियां भी बनवाई गई लेकिन रखरखाव के अभाव में दशक पूर्व बनी नालियां या अस्तित्व खोने की कगार पर पहुंच चुकी हैं या उस पर अतिक्रमण कर रिहायशी घर, दलान, पशुशाला की शक्ल ले चुकी हैं। 10 फीसद कारगर नालियों पर आश्रित किसानों को पानी खेत तक पहुंचा पाना मुश्किल बना रहता है। यही कारण है कि बरसात होने के बाद भी कुछेक गांवों में सिंचाई करने के लिए किसान विभागों की दुहाई देने में कसर नहीं छोड़ते।
किसान शिवपूजन सिंह, सुनील सिंह, मो.नसीम, आफताब आलम, मो.इश्तियाक, सुरेश कुमार सरोज आदि का दर्द रहा कि यदि विभागीय अधिकारी-कर्मचारी नालियों की नींव रखने, गांव के अंतिम टेल तक नजरी नक्शा तैयार करते समय ही मानक पर ध्यान दिया गया होता तो समस्या न खड़ी होती। अब भी समय है विकास खंड डीघ, अभोली, सुरियावां, भदोही, ज्ञानपुर के गांवों का स्थलीय निरीक्षण कराते हुए जर्जर हो चुकी नालियों का पुनर्निर्माण, अतिक्रमणमुक्त कराने, सफाई करा दिया जाय तो किसानों को काफी हद तक राहत मिलने में देर नहीं लगेगा।
अधिशासी अभियंता नलकूप नंदलाल ने कहा कि हर साल कुछ नालियां सही कराई जाती है। टूूटी 50 किमी नालियों को सही कराने के लिए बजट का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।