ज्ञानपुर। 2019 के चुनावी समर में भदोही के मौजूदा सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त के बलिया जाने से भदोही संसदीय सीट की सियासत गरमा गई है। आम जनता से लेकर भाजपा एवं गठबंधन के समर्थकों की बेचैनी बढ़ गई है कि अब भाजपा भदोही सीट पर किसको योद्धा बनाकर उतारेगी। लखनऊ से दिल्ली की दौड़ लगा रहे दावेदारों ने भी सक्रियता बढ़ा दी है।
भदोही संसदीय सीट से वीरेंद्र सिंह 2014 में मोदी लहर में जीत दर्ज कर संसद पहुंचे थे। वह पहले भी मिर्जापुर-भदोही सीट से सांसद रह चुके हैं। 2019 में चुनावी समीकरण बदल चुका है। विकास के दावों के बीच विरोध के सुर भी तेज हो गए थे। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व एक-एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए फंक-फूंक कर कदम उठा रहा है। सूबे की कई सीटों पर नए प्रत्याशियों की घोषणा और सीट बदलने के बाद भदोही संसदीय सीट पर नए प्रत्याशी के आने की अटकलें काफी दिनों से चल रहीं थीं। मंगलवार की शाम को भाजपा की ओर से प्रत्याशियों की जारी लिस्ट में सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को बलिया से टिकट दे दिया गया, जबकि भदोही सीट से प्रत्याशियों की घोषणा अब तक नहीं हो पाई है। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ गई है। मस्त को बलिया भेजने के बाद कई महीने से टिकट के लिए दौड़ भाग कर रहे दावेदारों को ऊर्जा मिल गई है।
सूत्रों की मानें तो पारी जातिगत आंकड़ों को नजर में रखकर प्रत्याशी की घोषणा करेगी। मस्त का टिकट कटने के बाद पक्ष और विपक्ष सभी की धड़कने बढ़ चुकी हैं। भाजपा से टिकट की दौड़ में वैसे तो कई वर्तमान एवं पूर्व विधायक संग एक पूर्व सांसद भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं लेकिन यहां से टिकट किसको मिलेगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा। सूत्रों की माने तो भदोही संसदीय सीट पर ब्राह्मण और बिंद वोटरों की संख्या अधिक है। ऐसे में ब्राह्मण और ओबीसी पर दांव खेल सकती है।