ज्ञानपुर/औराई। किसानों की लहलहाती फसलों को बचाने के लिए जिले में बनीं अस्थायी गोशालाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। अव्यवस्थाओं से अस्थायी गोशालाओं पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। चारा, पानी के अभाव में मवेशी आसपास के खेतों में पहुंचकर फसलों को नष्ट कर रहे हैं। औराई चीनी मिल में बने अस्थायी गोशाला के खंभे और तार टूटने से आसपास की सैकड़ों बीघे फसल पर संकट मंडराने लगा है।
सूबे में भाजपा की सरकार बनने के बाद गो तस्करी पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इससे गांवों में मवेशियों की बाढ़ सी आ गई। नीलगाय से अधिक किसानों का नुकसान छुट्टा मवेशी करने लगे। प्रदेश भर में आए संकट को देखते हुए शासन ने अस्थायी गोशाला बनाकर ऐसे मवेशियों को संरक्षित करने का निर्देश दिया। जिले के चकवां, डुड़वाधरमपुरी, औराई चीनी मिल समेत 18 स्थानों पर अस्थायी गोशाला खोली गईं।
महीने भर पूर्व चारा, पानी समेत अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए ब्लॉकवार पांच अस्थायी गोशाला को पांच-पांच लाख रुपये आवंटित किए गए। जबकि पिपरिस के लिए 10 लाख भेजा गया, लेकिन खामियों के चलते गोशालाओं पर तमाम अव्यवस्थाएं कायम हैं। औराई में खाली पड़ी चीनी मिल में बनी अस्थायी गोशाला में करीब आठ सौ मवेशी हैं। कुछ अराजकतत्वों ने खंभों और कंटीले तारों को तोड़ दिया तो कुछ मवेशियों ने ही उखाड़ दिए। इससे आसपास के फसलों पर जहां संकट के बादल मंडराने लगे हैं, वहीं यहां से मवेशी को पशु तस्कर भी ले जा सकते हैं। पैसे के अभाव में पशुओं को चारा ग्रहण करने के लिए न तो चन्नी और ना ही नाद की व्यवस्था की गई, जिसमें पशु आराम से चारा ग्रहण कर सकें।
परिसर में मनरेगा से तालाब तो खोद दिया गया लेकिन उसका भी भुगतान नहीं हो सका है। औराई के खंड विकास अधिकारी श्याम जी ने कहा कि नाद और चन्नी के लिए स्थानीय विधायक से बात हुई थी, लेकिन वह पूरा नहीं हो सका है। खंभे आदि टूटने की खबर मिली है। स्थानीय पुलिस को सूचित किया जाएगा। पशुशाला की सेवा में लगे लोगों के लिए मानदेय की कोई व्यवस्था नहीं है।
सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने कहा कि अस्थायी गोशाला में ब्लॉकवार आवंटित राशि 35 लाख भेजी गई है। किसी अस्थायी गोशाला को अधिक पैसे की जरूरत है तो बीडीओ, प्रधान और सेक्रेटरी प्रस्ताव बनाकर दें तो दिया जाए। उन्होंने कहा कि एक करोड़ 20 लाख की लागत से पिपरिस में बनने वाले स्थायी गोशाला का निर्माण पूर्ण होने पर सभी मवेशी वहीं चले जाएंगे।