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चार साल पूरा न हो सका आदर्श गांव का सपना

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सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त द्वारा गोद लिए आदर्श गांव कौलापुर को आदर्श बनाने का सपना चार साल में भी पूर्ण नहीं हो सका। उधर सांसद का दावा है कि गांव में कई विकास कार्य कराए गए, जबकि ग्रामीण उसे ज्ञानपुर विधायक की देन मान रहे हैं।
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2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान कौलापुर में मोदी की सभा हुई थी। उसके बाद केंद्र में सरकार बनी तो सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त ने कौलापुर को ही गोद लिया। उनके अनुसार प्रदेश में सपा सरकार होने के बाद विकास से जुड़े कार्य कच्छप गति से ही चले। 2017 में सूबे में भाजपा की सरकार बनी, तो काम में कुछ तेजी आई। अमर उजाला ने शुक्रवार को गांव की पड़ताल की तो पूर्व से कुछ हद तक तस्वीर बदलती दिखी। गिनी-चुनी बस्ती को छोड़ दें तो संपर्क मार्ग, इंटरलाकिंग से कहीं कीचड़ नहीं दिखता। गांव में वैसे तो स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, इंटरलाकिंग, विद्युतीकरण, सामुदायिक भवन समेत अन्य विकास कार्य हुए हैं। लेकिन ग्रामीण उसको सांसद की देन नहीं मानते। उनका कहना है कि कौलापुर में रहने वाले ज्ञानपुर विधायक विजय मिश्र ने ज्यादातर विकास कार्य कराए। सात हजार की आबादी वाले गांव में कई बस्तियों में आज भी विकास नहीं हुआ। ग्रामीण श्यामधर मिश्र ने कहा कि गिने-चुने कार्य ही सांसद ने कराए हैं। कमलेश यादव ने कहा कि पेयजल टंकी और आरो प्लांट तो लग गया, लेकिन सप्लाई अब तक नहीं हो सकी है। आदर्श गांव चुनेे जाने पर लोगों ने जो सपना देखा तो वह अधूरा रह गया। हालांकि अरविंद चौबे ने सांसद के कार्य पर संतोष जताया।
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सांसद विरेंद्र सिंह ने कहा कि कौलापुर में सांसद निधि से सोलर लाइट, सामुदायिक हाल बनाया गया। शासन से पेयजल टंकी, आरो वाटर प्लांट, विद्युतीकरण, सड़क का काम हुआ। कुछ समस्याओं से पानी की सप्लाई हर घर तक नहीं हो सकी है। चार साल में करीब 15 बार गांव में सांसद जा चुके हैं। विकास में प्रदेश सरकार का भी पैसा लगता है, ऐसे में विधायक का नाम हो सकता है।
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इनसेट
सांसद आदर्श गांव बनने के बाद कौलापुर का काफी विकास हुआ। सांसद और विधायक दोनों ने ही मिलकर गांव की तस्वीर बदली। हालांकि अभी भी कुछ बस्ती में समस्याएं हैं, जिसे समय रहते पूर्ण कर लिया जाएगा। ऊषा मिश्रा, ग्राम प्रधान कौलापुर
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