ज्ञानपुर (भदोही)। किसानों की कर्जमाफी को लेकर जिला प्रशासन की जांच में नए तथ्य उजागर होने लगे हैं। कर्जमाफी के लिए पूर्व में चयनित 22 हजार से अधिक किसानों में प्रथम चरण में कर्ज माफ करने के लिए चिह्नित किए गए 10 हजार किसानों में से 2800 से अधिक किसान अपात्र मिले हैं। जबकि पहले जिला प्रशासन ने लघु और सीमांत किसानों की श्रेणी में इन सभी को रखा था। अपात्र किसान या तो दो हेक्टेयर से अधिक खेती वाले मिले या 31 मार्च 2016 तक उनका कोई कर्ज बैंकों में नहीं था।
2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपने घोषणापत्र में कर्जमाफी का जिक्र किया था। सरकार बनने के बाद सरकार ने एक लाख तक कर्जमाफी का एलान किया। प्रशासन की ओर से तय की गई सूची में लघु एवं मध्यम दर्जे के 22 हजार 254 किसान चिह्नित किए गए। पहले चरण में किसानों को लाभ देने के लिए 10 हजार 228 किसानों को शामिल किया गया है। तहसीलों, बैंकों के माध्यम से कराई गई जांच के बाद दो दिन पूर्व 3554 किसानों का 22 करोड़ 42 लाख सात हजार ऋण माफ किया गया। इस दौरान अभिलेखीय जांच के दौरान दो हजार 882 किसान अपात्र मिले। यह किसान ऋणमाफी के मानक को पूर्ण नहीं कर रहे थे। नोडल अधिकारी उप निदेशक कृषि अरविंद कुमार सिंह ने बताया कि साढ़े तीन हजार किसानों को कर्जमाफी का लाभ दे दिया गया है। अपात्र किसानों का आवेदन ही निरस्त कर दिया गया। जिला स्तरीय समिति की ओर से 3760 किसानों के अभिलेखों की दोबारा जांच करने की संस्तुति की गई है। जांच के बाद उन्हें कर्जमाफी का लाभ दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन किसानों को कर्जमाफी की सूची से अलग किया गया है, वह शासन से तय मानक को पूरा नहीं कर रहे थे। बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को पूर्ण करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। पखवारे भर के अंदर सभी किसानों को लाभ दे दिया जाएगा। वहीं, दूसरी ओर कर्जमाफी के लिए चिह्नित किसानों में करीब तीन हजार अपात्र मिलने पर विभाग के कान खड़े हो गए हैं। साथ ही यह सवाल भी उठने लगा है कि अगर अभिलेखीय जांच में किसान अपात्र थे तो पूर्व में किस आधार पर उनको शामिल किया गया था।