साल 2015 के मार्च में ओलावृष्टि और अतिवृष्टि के चलते तैयार फसल गंवा चुके जिले के 84 हजार किसानों में से महज 22 हजार किसान दो साल में मुआवजा पा सके। 62 हजार किसान अब भी सरकारी मदद के इंतजार में बैंकों के चक्कर लगा रहे हैं, जो मिलना मुश्किल है। शासन से मिले15.40 करोड़ रुपये में प्रथम चरण में 5.80 करोड़ रुपये मुआवजे का वितरण किया गया, लेकिन नौ करोड़ रुपये नहीं बांटे जा सके।
वर्ष 2015 में बेहतर पैदावार को ध्यान में रखते हुए किसानों ने गेहूं की बुवाई की। मार्च तक गेहूं की फसल तैयार हो चुकी थी, लेकिन उसी दौरान ओलावृष्टि-अतिवृष्टि होने से भारी मात्रा में फसल बर्बाद हो गई। सरकार की ओर से मुआवजा देने का ऐलान किया गया। पहले चरण में शासन से करीब छह करोड़ रुपये मुआवजे के लिए भेजे गए। प्रशासन की ओर से चिन्हित किसानों को सरकारी मदद वितरित की गई। उसके बाद दूसरे चरण में शासन ने नौ करोड़ रुपये मुआवजा वितरण के लिए आवंटित किया। इस दौरान मदद सीधे किसानों के खाते में भेजने के लिए कहा गया।
दो साल का समय गुजरने के बाद भी 70 फीसदी किसानों को मुआवजा नहीं वितरित किया गया। ज्ञानपुर तहसील में प्रभावित 204 गांवों के 40 हजार किसानों में मात्र 6300 किसानों को एक करोड़ 73 लाख 83 हजार रुपये का मुआवजा वितरित हुआ, जबकि 33 हजार 820 किसानों के पांच करोड़ 26 लाख रुपये डंप पड़े रह गए। भदोही तहसील के प्रभावित 197 गांवों के 15 हजार 726 किसानों में से 103 गांवों के 4937 किसानों को एक करोड़ 45 लाख वितरित हुआ। 94 गांवों के साढ़े 10 हजार किसानों के हिस्से के दो करोड़ 54 लाख 45 हजार रुपये डंप रह गए।
इसी तरह औराई तहसील के 124 प्रभावित गांवों के 28 हजार 803 किसानों में से 85 गांवों के 7366 किसानों के बीच दो करोड़ 61 लाख वितरित किए गए। जबकि 19 हजार 528 किसानों का एक करोड़ 38 लाख 36 हजार रुपये वितरित होना शेष रह गया। अब 31 मार्च को वित्तीय वर्ष समाप्त होने वाला है। ऐसे में इतने कम समय में इस धनराशि को किसानों तक पहुंचाना प्रशासन के लिए टेढ़ी खीर मानी जा रही है। किसानों ने कहा कि उनके सामने भारी समस्या आ गई है। जिले के लोगों का कहना है कि राजस्व विभाग की उदासीनता से मुआवजा अब तक नहीं मिल सका।