ज्ञानपुर। नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए डीएम राजेंद्र प्रसाद ने पंचायत राज एक्ट 1998 को प्रभावी बनाने के लिए पत्र जारी कर कार्यक्रमों, गोष्ठियों में महिला जनप्रतिनिधियों को उपस्थित होने का निर्देश दिया है। कहा कि अब प्रतिनिधि के तौर पर उनके पति या बेटे हिस्सा नहीं लेंगे। सभी बीडीओ संग जिलास्तरीय अधिकारियों को इसे प्रभावी करने का निर्देश दिया।
आजादी के बाद से ही नारी सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकारों ने भले ही महिलाओं को आधी आबादी घोषित कर उन्हें 50 प्रतिशत आरक्षण दिया पर उनके अधिकारों पर पुरुषों का कब्जा बरकरार रहता है। ग्राम प्रधान, सभासद, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य से लेकर अन्य पदों पर निर्वाचित होने वाली महिलाएं पद एवं गोपनीयता की शपथ जरूर लेती हैं, लेकिन पांच साल तक उनके कार्यों को परिवार वाले यानि पति या बेटे ही देखते हैं। इससे तमाम कवायद के बाद भी सरकार की मंशा सफल नहीं हो पाती और महिला चहारदीवारी के अंदर ही सिमटकर रह जाती रही है। इस प्रथा को खत्म करने के लिए जिलाधिकारी राजेंद्र प्रसाद ने आदेश जारी कर आने वाले समय में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों, शिकायतों की जांच आदि के दौरान महिला जनप्रतिनिधि को उपस्थित रहने का निर्देश दिया।