बज्मे गुलशने अदब के तत्वावधान में शनिवार की रात काजियाना के मुशायरे में कई जनपदों के शायरों ने अपने कलाम समाज में व्याप्त कुरीतियों और बुराइयों पर जमके प्रहार किया। शायरों ने कौमी यकजहती और समाज में साक्षरता पर बल दिया। मुख्य अतिथि कालीन निर्यातक अतहर अंसारी ने दलितों और पिछड़ी जातियों में शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने का आह्वान किया। कहा कि इसमें मुशायरे अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि उर्दू मीठी जुबान है। इसे हर किसी को अपनाना चाहिए। उन्होंने शायरों और कवियों का समाज पर योगदान गिनाए। कहा कि ये रचनात्मक ढंग से समाज में व्याप्त बुराइयों पर प्रहार करते हैं और लोगों को सही दिखाते हैं। इलाहाबाद के शायर अबु तुराब ने मां की ममता पर कलाम पेश किया। कहा- सारी दुनियां सिर्फ खाना जानती है, एक मां है जो खिलाना जानती है। वाराणसी के शायर खलील राही ने वतन की शान में कहा- कहा मादरे हिंदुस्तान पर आंच न आए कभी, यह नसीहत है हर हिंदुस्तानी के लिए। बुजुर्ग शायर रौनक भदोहवी ने कहा, ’बुलंदियों पर चढ़ो जिस तरह भी जी चाहे, कदम संभाल के लेकिन ढलान पर रखना।’
उस्ताद शायर मजनू भदोहवी ने वर्तमान व्यवस्था पर सुनाया - आक्सीजन की कमी से जल गए, गुलशन के फूल। रात भर रोता है गुलशन रात रानी के लिए। आरिफ जाफरी के शेर का सामयीन ने वाहवाही के साथ स्वागत किया। शायर शाबान करीमी के अशआर का भी लोगों ने तालियों से स्वागत किया। जावेद आशिम, शमशाद करीमी, फैयाज भदोही, मजाहिया शायर भरकम भदोहवी, रौनक भदोहवी, मुस्ताक बनारसी के कलाम भी सराहे गए। संचालन कैसर जौनपुरी ने किया। पूर्व विधायक जाहिद बेग भी मुशायरे में उत्साहवर्धन करने पहुंचे।